फॉलो-अप टीम की कार्रवाई से पीड़ितों को लौटाए गए 7.74 लाख रुपये
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। साइबर अपराधियों के खिलाफ उत्तराखंड एसटीएफ की कार्रवाई लगातार जारी है। साइबर ठगी से संबंधित शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए गठित विशेष फॉलो-अप टीम की सक्रियता से मई 2026 में साइबर अपराध पीड़ितों की 2.24 करोड़ रुपये की धनराशि सुरक्षित कराई गई, जबकि 7.74 लाख रुपये पीड़ितों के खातों में वापस भी कराए गए।
एसटीएफ के अधीन संचालित राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन 1930 कंट्रोल रूम को साइबर अपराध पीड़ितों की धनराशि को तत्काल होल्ड कर सुरक्षित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत मई 2026 के दौरान विभिन्न माध्यमों से ठगी गई 2.24 करोड़ रुपये की राशि को समय रहते सुरक्षित किया गया।
राष्ट्रीय वित्तीय हेल्पलाइन 1930 की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा एक विशेष फॉलो-अप टीम का गठन किया गया है। टीम ने मई माह में साइबर ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों को चिन्हित कर धनराशि होल्ड कराने की कार्रवाई की।
फॉलो-अप टीम के अतिरिक्त प्रयासों से विभिन्न बैंक खातों में होल्ड की गई धनराशि को न्यायालय के रिलीज आदेश के माध्यम से संबंधित बैंक नोडल अधिकारियों को प्रेषित किया गया। इसके परिणामस्वरूप मई माह में साइबर अपराध पीड़ितों के खातों में 7.74 लाख रुपये वापस कराए गए।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने लोगों से अपील की है कि वे अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। कमीशन या किराये पर बैंक खाता उपलब्ध कराना अपराध है। एटीएम कार्ड, ओटीपी, पिन और यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें। अज्ञात स्रोत से धनराशि प्राप्त होने पर तत्काल बैंक अथवा पुलिस को सूचित करें।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट की धमकी देता है तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि कोई भी सरकारी एजेंसी ऑनलाइन गिरफ्तारी नहीं करती। लोगों को फर्जी निवेश योजनाओं, यूट्यूब लाइक- सब्सक्राइब योजनाओं, टेलीग्राम आधारित निवेश ऑफरों तथा धनराशि दोगुनी करने के झांसे से बचना चाहिए।
किसी भी प्रकार की वित्तीय साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते धनराशि सुरक्षित कराई जा सके।



