‘एनईपी-2020 के अनुरूप हो शिक्षक शिक्षा संस्थानों का नया ढांचा’

‘राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा रूपरेखा आने तक SCERT-DIET पुनर्गठन पर रोक लगे’

वित्त विभाग को सौंपा ज्ञापन

अविकल उत्तराखंड

देहरादून। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-टीई) और शिक्षक शिक्षा संबंधी राष्ट्रीय दिशानिर्देश अभी जारी होने बाकी हैं। ऐसे में राज्य स्तर पर एससीईआरटी और डायट के पुनर्गठन का नया ढांचा लागू करना अव्यावहारिक और जोखिमपूर्ण साबित हो सकता है। यह बात एससीईआरटी के अध्यक्ष विनय थपलियाल ने अपर सचिव वित्त से मुलाकात के दौरान कही। उन्होंने इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा।
विनय थपलियाल ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत पारंपरिक डीएलएड और बीएड पाठ्यक्रमों के स्थान पर चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) को अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) शिक्षक शिक्षा की व्यापक रूपरेखा को अंतिम रूप दे रही है, जिसमें एससीईआरटी और डायट के नए ढांचे, वहां कार्यरत विशेषज्ञों की योग्यता तथा कार्यप्रणाली को स्पष्ट किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पुनर्गठन पर विचार-विमर्श चल रहा है तथा इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भी भेजा गया है। हालांकि, राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा पाठ्यचर्या रूपरेखा अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुई है। ऐसे में यदि राज्य स्तर पर स्थायी ढांचा तैयार किया जाता है तो भविष्य में राष्ट्रीय अनुशंसाओं के अनुरूप दोबारा संशोधन और पुनर्संरचना की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे समय, संसाधन और प्रशासनिक ऊर्जा का दोहरा व्यय होगा।
ज्ञापन में आग्रह किया गया है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा पाठ्यचर्या रूपरेखा और उससे संबंधित अंतिम दिशानिर्देशों की प्रतीक्षा करे। इसके बाद ही एससीईआरटी और डायट की संस्थागत संरचना, मानव संसाधन, शैक्षणिक दायित्वों और पाठ्यक्रम व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। इससे राज्य की शिक्षक शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक रूप से मजबूत बन सकेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव केवल संस्थागत ढांचे का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह भविष्य के शिक्षकों की तैयारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नींव से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इससे पूर्व उन्होंने अपर सचिव कार्मिक से भी मुलाकात कर इस विषय पर विस्तृत जानकारी और सुझाव साझा किए थे।

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