उत्त्तराखण्ड में भाजपा की जीत के बाद नये सीएम पर मंथन शुरू

कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, धनसिंह रावत, बिशन सिंह चुफाल का नाम चर्चाओं में. हार के बाद भी धामी की पैरवी में जुटे पार्टी नेता

चंपावत से विधायक कैलाश गहतोड़ी व कपकोट से सुरेश गड़िया ने पुष्कर सिंह धामी के लिए सीट खाली करने की बात कही है.

महिला दावेदारों में कोटद्वार से जीती ऋतु खंडूडी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गयी है

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून। उत्त्तराखण्ड में एक बार फिर चले मोदी मैजिक के बाद इतिहास बनाने वाली भाजपा में नये सीएम को लेकर जोड़तोड़ शुरू हो गयी है। खटीमा से चुनाव हारने के बावजूद पार्टी का एक गुट पुष्कर सिंह धामी को फिर से सीएम बनाने की वकालत में जुट गया है। इस सोच के भाजपाइयों का कहना है कि धामी के मात्र छह महीने के कार्यकाल में लिए गए जनहित फैसलों की वजह से जनता ने भाजपा पर फिर से विश्वास जताया।

धामी के अलावा नये सीएम की लाइन में सतपाल महाराज ,धनसिंह रावत, बिशन सिंह चुफाल के अलावा मसूरी से चौथी बार चुनाव जीते गणेश जोशी का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। महाराज व चुफाल भी लगातार विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं। महिला दावेदारों में कोटद्वार से जीती ऋतु खंडूडी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गयी है।

सूत्रों का कहना है कि कुछ दिन पूर्व गणेश जोशी ने संघ व पार्टी के केंद्रीय नेताओं से बात की थी। यही नहीं, भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजय वर्गीय से मध्य प्रदेश में भी गणेश जोशी ने मुलाकात की भी खबर है। इसके बाद ही कैलाश विजयवर्गीय मतगणना से पहले देहरादून में पार्टी नेताओं से मिले थे।

सूत्रों के कहना है कि पार्टी हाईकमान बंपर मतों से जीते गणेश जोशी के नाम पर कुमाऊँ व गढ़वाल को एक साथ साधना चाहता है।

भाजपा के मंत्री धनसिंह रावत भी श्रीनगर से चुनाव जीत गए हैं। हालांकि, धनसिंह रावत की जीत का अंतर बहुत अधिक नहीं रहा। लेकिन संघ व केंद्रीय नेताओं के बीच गहरी पैठ होने के कारण धन सिंह रावत का नाम भी नये सीएम के दावेदारों में शुमार है।

इधर, 2014 में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये सतपाल महाराज भी चौबट्टाखाल से चुनाव जीत गए हैं। 2017 के बाद सतपाल महाराज भी तीन मौकों पर सीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। त्रिवेंद्र रावत व तीरथ सिंह रावत के सीएम पद से हटने के बाद सतपाल महाराज को उम्मीद थी कि हाईकमान उन पर भरोसा जतायेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सीएम धामी के चुनाव हारने के बाद महाराज का भी दावा मजबूत माना जा रहा है।

इधर, पार्टी सूत्रों का कहना है कि विधायकों के अलावा कुछ अन्य नामों पर भी उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। धामी को सीएम बनाने की कीमत पर किसी विधायक की सीट खाली करा उपचुनाव कराना पड़ेगा।

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