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भाजपा-कांग्रेस ने विचलन से रेवड़ी की तरह खूब बांटी चहेतों को नौकरी

    …ये सिलसिला आज का नहीं बरसों पुराना है. देखें किस सीएम ने विचलन से कितनी तदर्थ नियुक्ति की.

विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूड़ी के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर के बाद विचलन से बांटी गई नौकरियों का मुद्दा गरमाया.

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून। उत्तराखण्ड की विधानसभा में चहेतों को नौकरी देने का सिलसिला बरसों पुराना है। सिर्फ धामी कार्यकाल में ही ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पहले सीएम स्वामी से लेकर आज तक चहेतों को विचलन के माध्यम से नौकरी दी गयी । हर राज्य में मुख्यमंत्री इस विचलन का प्रयोग कर मुद्दों को हल करने का रास्ता निकालते रहे हैं।

विधानसभा में भर्तियों को लेकर एक बार फिर सरकार के विचलन के हथियार बहस छिड़ गई है। कांग्रेस का आरोप है कि सीएम धामी ने विचलन का इस्तेमाल कर बैकडोर एंट्री कर नौकरियां दी।

दरअसल, विधानसभा भर्ती घोटाले में नैनीताल हाईकोर्ट ने डबल बैंच ने स्पीकर प्रेमचन्द अग्रवाल व गोविन्द सिंह कुंजवाल के समय 228 लोगों को नौकरी से हटाने के स्पीकर ऋतु खंडूड़ी के फैसले पर मुहर लगा दी।

इससे पूर्व, हाईकोर्ट की एकल बेंच ने 228 तदर्थ नौकरी पाए लोगों को हटाने सम्बन्धी फैसले पर स्टे दे दिया था।

इसके बाद इस हटाने सम्बन्धी फैसले पर उंगली उठने के बाद विधानसभा प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ हाईकोर्ट की डबल बेंच में तथ्य पेश किए।

विधानसभा भर्ती घपले के शोर के बाद स्पीकर ऋतु खंडूड़ी की बनाई डीके कोटिया समिति की रिपोर्ट और खुद विधानसभा के हाई कोर्ट में दाखिल किए गए काउंटर में विचलन से हुई नियुक्तियों का सिलसिलेवार जिक्र किया गया है।

BJP-Congress distributed jobs to their loved ones like Revadi due to deviation

विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूड़ी के फैसले पर हाईकोर्ट की मुहर के बाद विचलन से बांटी गई नौकरियों के मुद्दा गरमाया

स्वामी कार्यकाल में विचलन से 53 तदर्थ नियुक्ति

साल 2001 –  तत्कालीन सीएम नित्यानंद स्वामी ने 53  पदों पर तदर्थ भर्ती को विचलन से ही मंजूरी दी।

तिवारी कार्यकाल में विचलन से 80 तदर्थ नियुक्ति

तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी ने तो खुला दिल दिखाते हुए विचलन से तदर्थ भर्ती को मंजूरी देने का रिकॉर्ड ही बना दिया। तिवारी के समय 2002 में 28, वर्ष 2003 में 05, वर्ष 2004 में 18, वर्ष 2005 में 08, वर्ष 2006 में  21 पदों को मंजूरी दी।

जनरल बीसी खण्डूड़ी कार्यकाल में 27 तदर्थ नियुक्ति

2007 में सीएम बने बीसी खंडूड़ी ने तो कुर्सी संभालने के महज कुछ महीने के भीतर ही 27 पदों पर तदर्थ भर्ती को मंजूरी दी।

हरीश रावत कार्यकाल में विचलन के जरिये 156 तदर्थ नियुक्ति

2014 में 07 और 2016 में 149 पदों पर तदर्थ भर्ती की विचलन से मंजूरी तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने दी। यही परंपरा 2022 में भी जारी रही।

धामी कार्यकाल में 2021 में 78 तदर्थ भर्तियां की गई। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इन भर्तियों को रद्द कर दिया गया।

प्रदेश में विचलन से तदर्थ नियुक्ति देने के मामले में सभी सीएम एक दूसरे से बढ़ चढ़कर रहे।

इधर, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने तदर्थ पदों  की मंजूरी सिर्फ एक साल के लिए दी थी।  यह अवधि दिसंबर 2022 में ही समाप्त हो रही थी। इससे पहले ही भर्ती घोटाले का शोर मचाने के बाद डीके कोटिया समिति की रिपोर्ट के बाद स्पीकर ने 2016 से 2021 तक की गई 228 तदर्थ नियुक्तियों को रद्द कर दिया।

अब चूंकि, विधानसभा प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल किए गए काउंटर के बाद यह साफ हो गया है कि बीते 22 साल में कांग्रेस और भाजपा के कर्ता धर्ताओं ने योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर अपने अपने लोगों को नौकरी दी।

विचलन से बांटी गई नौकरियों के मुद्दे पर सभी हमाम में नंगे नजर आ रहे हैं..इस मुद्दे पर विपक्षी दल कांग्रेस के बजाय सिर्फ जनता को ही नाराजगी प्रकट करने का अधिकार है..

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