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नड्डा के हेलीकाप्टर की गड़गड़ाहट और निलंबित पूर्व मंत्री लाखीराम जोशी का लेटर बम

अनुशासनहीनता नहीं पीएम से अनुरोध किया, पार्टी के लिए खून पसीना बहाया – लाखीराम जोशी

न अनुशासन भंग, न ही किसी पर आरोप मात्र सुझाव दिए, केंद्रीय नेतृत्व ध्यान दे- जोशी

आडवाणी,उमा भारती ने आरोप लगते ही दिया इस्तीफा।

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून। एक ओर शुक्रवार की गुनगुनी दोपहर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का हेलीकाप्टर हरिद्वार में लैंड कर रहा था तो दूसरी ओर,निलंबित पूर्व कैबिनेट मंत्री लाखीराम जोशी का रिप्लाई भाजपा कार्यालय में लैंड कर रहा था।

पूर्व मंत्री लाखीराम जोशी प्रदेश महामंत्री कुलदीप कुमार को पत्र सौंपते हुए। 13 नवंबर को पार्टी ने उन्हें सीएम त्रिवेंद्र के खिलाफ पत्र लिखने पर निलंबित किया था।

बीते 12 नवंबर को पूर्व मंत्री लाखीराम जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में सीएम को हटाने की मांग की थी। अगले दिन 13 नवंबर को प्रदेश भाजपा संगठन ने तत्काल जोशी को पार्टी से निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नतीजतन, शुक्रवार को पूर्व मंत्री अपने जवाब को लेकर पार्टी मुख्यालय पहुंचे।

शुक्रवार को नड्डा के उत्त्तराखण्ड आगमन पर पूर्व मंत्री जोशी ने देहरादून के भाजपा मुख्यालय में दोपहर करीब 1 बजे महामंत्री कुलदीप कुमार को अपने जवाब का मजमून सौंपा। इसी समय, भाजपा नेता अनिल गोयल भी कक्ष में मौजूद थे। कार्यालय में फ़ोटो खिंचवाई , वीडियो बनवाया और फिर कार्यालय में ही चैनल से भी बात की। कुछ देर बाद जोशी समर्थकों ने फोटो, वीडियो और प्रेस विज्ञप्ति भी  व्हाट्सएप्प कर दी।

अपने जवाब में जोशी ने साफ कहा कि उन्होंने कोई अनुशासन भंग नही किया है। न ही किसी पर आरोप लगाए। पत्र में मात्र सुझाव ही दिए।उच्च न्यायालय के सीएम त्रिवेंद्र के खिलाफ दिए गए सीबीआई जांच  के आदेश के क्रम में अपनी बात कही थी। पहली बार हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया जो कि बहुत ही गंभीर है। पूर्व मंत्री जोशी ने पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि आरोप लगते ही आडवाणी, उमा भारती ने भी इस्तीफा दिया था। उन्होंने कहा कि सामाजिक जीवन में जब भी कोई आरोप लगता है तो जांच से ही उसका निस्तारण होता है।

पूर्व मंत्री जोशी ने एक बार फिर पीएम से अनुरोध करते हुए कहा कि जब तक मामले की जांच नही हो जाती तब तक सीएम त्रिवेंद्र को इस्तीफा दे देना चाहिए।

पूर्व मंत्री लाखीराम जोशी के जवाब के बाद प्रदेश कार्यालय से लेकर भाजपा की राजनीति में नये सिरे से हलचल मच गई। लेटर की टाइमिंग को लेकर भी  अलग अलग स्वर सुनायी दिए। एक गुट का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा के आगमन पर इससे बचा जाना चाहिए था जबकि दूसरे गुट का कहना कि पूर्व मंत्री ने सही टाइमिंग पर जवाब दिया। जोशी का यह पत्र भाजपा की अंदरूनी जंग को और हवा दे गया।

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