कोरोना से 52 की डेथ, 8 बैकलॉग, कुल 60 डेथ, 1942 पॉजिटिव

कुल डेथ 6261, ब्लैक फंगस से अब तक 14 मौत

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून।शुक्रवार, 28 मई के हेल्थ बुलेटिन में चंपावत 6, देहरादून व पिथौरागढ़ में 1-1 बैकलॉग कोरोना डेथ सामने आई। प्रदेश में अभी तक कुल कोरोना डेथ का आंकड़ा 6261 तक पहुंच गया। मौजूदा समय में डेथ रेट 1.92 प्रतिशत है।  शुक्रवार को 52 डेथ हुई। इसके अलावा ब्लैक फंगस से अभी तक 14 मौत हो चुकी है। इस बीमारी के प्रदेश में 161 मामले सामने आ चुके हैं। ब्लैक फंगस के 13 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज किये जा चुके हैं। (देखें हेल्थ बुलेटिन)

उत्तराखंड की टीकाकरण रणनीति

अनूप नौटियाल
सोशल डेवलपमेंट फाॅर कम्यूनिटी फाउंडेशन
देहरादून, उत्तराखंड
www.sdcuk.in

पृष्ठभूमि

उत्तराखंड में 16 जनवरी, 2021 को कोविड टीकाकरण का कार्य शुरू हुआ था। तब से लेकर 27 मई, 2021 तक राज्य में लोगों को 35,36,840 डोज वैक्सीन दी जा चुकी हैं। 21,72,760 लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है, जबकि 6,82,040 लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी हंै।

उत्तराखंड की अनुमानित आबादी 1.15 करोड़ है। इसी तरह राज्य मे 18 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों की अनुमानित आबादी 66 लाख है। यदि यह अनुमान सही है तो हमें 66 लाख आबादी के लिए कम से कम 1.32 करोड़ डोज वैक्सीन की जरूरी होगी (इसमें खराब होने वाली वैक्सीन शामिल नहीं हैं)।

हर्ड इम्यूनिटी के लिए उत्तराखंड में कुल आबादी के कम से कम 70 प्रतिशत हिस्से को वैक्सीन की दोनों डोज दिया जाना आवश्यक है। अब तक सामने आये नतीजों के आधार पर कहा जा सकता है कि उत्तराखंड की 70 प्रतिशत आबादी (80 लाख से ज्यादा) आबादी को सम्पूर्ण टीकाकरण करने में 16 से 18 महीने और लगेंगे। यानी कि यह टीकाकरण की वर्तमान प्रगति बनी रहती है तो हमारी 70 प्रतिशत आबादी को अगले वर्ष यानी 2022 के अंत तक या छोटी तिमाही तक ही वैक्सीनेट किया जा सकेगा।

इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि अभी तक जो नतीजे सामने आये हैं, उनके अनुसार वैक्सीनेशन में कई बाधाएं आ रही हैं। जब तक इन बाधाओं को दूर नहीं किया जाता तब तक सर्विलांस, डेथ रेट और पाॅजिटिविटी रेट को देखते हुए लाॅकडाउन लगाने या खोलने को लेकर कोई सम्मत निर्णय लिया जाना चाहिए। उत्तराखंड को देश के दूसरे राज्यों द्वारा उठाये जा रहे कदमों की नकल करने के बजाय राज्य की विषम परिस्थितियों और अब तक के विकास को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

इस लघु पत्रक में कुछ ऐसे बिन्दु दिये जा रहे हैं, जिन पर अमल करके सरकार राज्य की पूरी आबादी के टीकाकरण के काम को आगे बढ़ाने में उपयोग कर सकती है।

पहली डोज

  1. हमें प्रयास करने होंगे कि ज्यादा से ज्यादा लोगों या सभी लोगों को हर हाल में वैक्सीन की पहली डोज दी जाए। इसके साथ ही हमें उन लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो उम्र के और स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशील है।

लक्षित वर्ग और हाॅट स्पाॅट

  1. अब तक मिले संकेतों के अनुसार कहा जा सकता है फिलहाल उन वर्गों पर फोकस किया जाना चाहिए जो टीबी, डायबिटीज आदि के मरीज हैं और अभी तक वाइरस की चपेट में नहीं आये हैं। हमें प्रयास करना चाहिए कि हम उन जगहों पर वैक्सीनेशन न करें, जहां संक्रमण तेजी से फैल रहा है। जहां उचित व्यवस्थाएं नहीं हैं, वहां भी वैक्सीनेशन नहीं किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को वैक्सीनेशन के तुरंत बाद संक्रमण जैसी स्थिति से बचाया जा सके।

वैसीनेशन सेंटर और मोबाइल वैक्सीनेशन

  1. उत्तराखंड जैसे छोटे और पर्वतीय राज्य के लिए आवश्यक है कि छोटे लेकिन, संख्या में ज्यादा वैक्सीनेशन सेंटर बनाये जाएं। अब तक हमारे वैक्सीनेशन सेंटर में कम या मध्यम संख्या में लोग टीका लगवाने पहुंचे हैं। ऐसे में हमें बहुत बड़े वैक्सीनेशन कैंप के बजाए छोटे -छोट कैंप लगाने की जरूरत है।

राज्य के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल टेस्टिंग की आवश्यकता है। शहरी क्षेत्रों में भी बुजुर्गों के लिए मोबाइल टेस्टिंग एक अच्छी पहला साबित हो सकती है। हरिद्वार से इस तरह की सेवा शुरू कर दी गई है और गैर सरकारी संगठनों के माध्यम से 600 से ज्यादा लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। इसे और विस्तार देने की जरूरत है।

संभावित स्थल

  1. वैक्सीनेशन रणनीति में वैक्सीनेशन वाली जगहों में परिवर्तन करने की व्यवस्था जरूरी है। उदाहरण के तौर में यदि मैदानी जिलों में ज्यादा मामले आने लगें तो हम वैक्सीनेशन को उन जिलों में फोकस करें जहां पाॅजिटिव मामलों की संख्या और पाॅजिटिविटी रेट कम हो।

वैक्सीन का भंडारण व खरीद

  1. वैक्सीनेशन का स्तर कम होने की स्थिति में राज्य सरकार पहले से किये गये भंडारण की मदद से उसे बढ़ा सकती हैं। भंडारण/स्टाॅकिंग ध्यान देने की आवश्यकता है। यह भी ध्यान रखना होगा कि हमारे पास वैक्सीन स्टोरेज और फ्रीज करने की पर्याप्त सुविधा हो। वैक्सीन की मात्रा बढ़ने की स्थिति में कोल्ड चेन को प्राॅपर तरीके से मेंटेन रखा जा सके और उसे वेस्ट होने से बचाया जा सके।
  2. ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया अभी राज्य में पूरी तरह से बंद है। वैक्सीन निर्माता कंपनियों से जल्द से जल्द बात करके सप्लाई चैन को स्थापित करने की आवश्यकता है।

एडवोकेसी

  1. राज्य सरकार का दायित्व है कि वह सिर्फ केंद्र से मिलने वाले निर्देशों की प्रतीक्षा करने के बजाए अपने स्तर पर और राज्य की जरूरत के अनुसार केन्द्र सरकार से बातचीत करके इस दिशा में आगे बढ़े। उत्तराखंड को अपने सीमावर्ती राज्य होने और पर्यटक व श्रद्धालु प्रदेश होने का लाभ उठाने का प्रयास करना चाहिए।

सेना एवं अर्द्ध सैनिक बल

  1. देश के सैन्य एवं अर्द्धसैनिक बलों में उत्तराखंड का योगदान सर्वविदित है। राज्य के सैन्य और अर्द्ध सैन्य बलों में काम करने वाले और सेवानिवृत्त हो चुके लोगों के साथ उनके परिवारों का सरकारी और प्राइवेट सेंटर्स पर निःशुल्क टीकाकरण आवश्यक है। राज्य सरकार को इसके लिए केंद्र सरकार से बातचीत करके लाभ उठाना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह

  1. यह अच्छी बात है कि राज्य में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम का गठन किया गया है। लेकिन यहां इस बात का ध्यान अवश्य रखा जाना चाहिए कि इस ग्रुप पर अफसरशाही हावी न हो। विशेषज्ञों का यह दल तथ्यों का अध्ययन करके वैज्ञानिक तरीके से रणनीति तैयार करे। जन स्वास्थ्य के मुद्दे पर विशेषज्ञों की टीम द्वारा लिए गये फैसलों को आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। इसमें अधिकारियों के हस्तक्षेप के कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

बेस्ट प्रेक्टिस

  1. देश के अन्य गांवों, नगरों, शहरों, जिलों अथवा विभिन्न राज्यों में अपनाई जा रही रणनीति और कार्य प्रणाली का अध्ययन किया जाना चाहिए और जहां जो कुछ बेहतर किया गया है, उसे उत्तराखंड में अपनाया जाना चाहिए।

नोट:राजस्थान के नागौर जिले के खुदी कलां गांव का उदाहरण साझा किया जा रहा है। 1 मई, 2021 तक इस गांव में 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी थी। स्थानीय प्रशासन के अनुसार इस गांव में इस आयुवर्ग के एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई।

यदि आप इस बारे में कुछ पूछना चाहें तो कृपया anoop.nautiyal@gmail.com अथवा मोबाइल नंबर 9760041108 पर संपर्क कर सकते हैं।

एम्स ऋषिकेश में ब्लैक फंगस के 106 मरीज भर्ती

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में शुक्रवार की शाम 5 बजे तक म्यूकोर माइकोसिस( ब्लैक फंगस) के कुल 117 केस आ चुके हैं। आज किसी भी मरीज की मृत्यु की खबर नहीं है।

अस्पताल से अभी तक 2 मरीजों को उपचार के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है। अब एम्स अस्पताल में म्यूकोर माइकोसिस के शेष 106 मरीज भर्ती हैं।

उत्तराखंड पुलिस द्वारा कोरोना की दूसरी लहर 24 मार्च 2021 से दिनांक 28 मई 2021 तक कोविड-19 के संक्रमण को रोकने हेतु की गई कार्यवाही साथ ही 01 मई 2021 से उत्तराखण्ड पुलिस द्वारा चलाये जा रहे मिशन हौसला के तहत अब तक आम जनता की सहायता हेतु कृत कार्यों का विवरण

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से पुलिस महानिरीक्षक कुमांयू परिक्षेत्र, पुलिस उपमहानिरीक्षक, गढवाल परिक्षेत्र एवं समस्त जनपदों के प्रभारियो के साथ जनपदों में वर्तमान में चल रहे कोविड काल के दौरान किये जा रहे कार्यो एंव वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा की गई ।
समीक्षा के दौरान पुलिस महानिदेशक ने विभिन्न बिन्दुओं पर विचार विमर्श कर समीक्षा करते हुए महत्त्वपूर्ण निर्देश दिये गयेः-


1- सभी जनपद प्रभारियों एंव पुलिस उपमहानिरिक्षक गढवाल परिक्षेत्र तथा पुलिस महानिरीक्षक कुमांयू परिक्षेत्र से कोरोना की वर्तमान स्थिति के संदर्भ में किये जा रहे कार्यो एंव कार्यवाहियों के संदर्भ में फीडबैक लिया गया तथा निर्देशित किया गया कि कोरोना काल में पुलिस द्वारा उत्कृष्ट कार्य किये गये उन्हे जारी रखा जाय तथा पुलिस का सेवाभाव सदैव बना रहना चाहिए।
2- सम्पूर्ण प्रदेश में कोरोना के केसों में कमी आयी है जिससे स्थिति मे सुधार है परन्तु कोरोना कफ्र्यू में निकट भविष्य में छूट दिये जाने पर स्थिति पर नजर बनाये रखे तथा कोरोना काल के नियमों का कठोरता से पालन कराये ताकि भविष्य में यह महामारी न फैले।
3- एसडीआरएफ द्वारा गोद लिये गये 20 गांवों में से भी उन गांवो का चयन किया जाय जो दूरस्थ है तथा वहां कोरोना महामारी से सम्बन्धित स्वास्थ्य सेवाओं एंव अन्य सेवाओं की मदद हेतु लगातार समन्वय स्थापित कर यथा सम्भव मदद की जाय।
4- पुलिस परिजनों के वेलफेयर तथा उनकी आवश्यकताओं यथा दवाईयां, मास्क, सेनेटाईजर आदि का वितरण विशेषरूप से किया जाय। पुलिसकर्मियों के निकट परिजनों (माता-पिता/बच्चे) के साथ किसी प्रकार की दुर्घटना यथा मृत्यु होने पर उनकी सहायता हेतु उपवा (UPWAA) के सदस्यों को जरूर भेजा जाय।
5- आगामी 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पुलिस विभाग द्वारा एक लाख पेड लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसका शुभारम्भ 05 जून 2021 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर किया जायेगा तथा समापन 16 अगस्त 2021 को हरेला के पर्व के अवसर पर होगा। अतः उपरोक्त कार्यक्रम के दृष्टिगत सम्बन्धित विभागों एंव संस्थाओं से समन्वय स्थापित कर ले।
6- चीता पुलिस से सम्बन्धित एस0ओ0पी0 पूर्व में जनपदों को भेजी जा चुकी है, चीता पुलिस इसी एस0ओ0पी0 के अनुरूप कार्य करेगी। भविष्य में चीता पुलिस को और स्मार्ट बनाने जाने हेतु उनको स्माल आर्म के साथ-साथ अन्य पुलिस कर्मियों को चीता पुलिस की टेनिंग दी जायेगी। रेज स्तर पर स्थित कार्यालय इस सम्बन्ध में समस्त डाटा तैयार कर ले।


मीटिंग में वी मुरूगेशन- पुलिस महानिरीक्षक, अपराध एवं कानून व्यवस्था, अमित सिन्हा- पुलिस महानिरीक्षक, पी0एम0, संजय गुन्ज्याल- पुलिस महानिरीक्षक, अभिसूचना एंव सुरक्षा, नीलेश आनन्द भरणे- पुलिस उपमानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था, श्रीमती रिधिम अग्रवाल- पुलिस उपमहानिरीक्षक, मोर्द्नईज़ेशन, अजय सिह- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के अतिरिक्त अन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

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