भाजपा नेता मोहन लाल बौंठियाल ने अपने गांव में ली आखिरी सांस

अंतिम संस्कार हरिद्वार के चंडीघाट में दोपहर 1 बजे किया जाएगा

अविकल उत्त्तराखण्ड

कोटद्वार। भाजपा नेता मोहन लाल बौंठियाल का शुक्रवार की सांय दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 78 वर्ष के थे। मिली जानकारी के मुताबिक बीते काफी समय से बीमार चल रहे थे। इन दिनों अपने गांव ऐता में स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे। उन्होंने भाजपा संगठन के विभिन्न पदों पर कार्य करने के अलावा सरकारी दायित्व भी बखूबी संभाले। संघ के निष्ठावान कार्यकर्ता रहे मोहनलाल बौंठियाल अपनी सादगी व विनम्रता के लिए भी जाने जाते रहे।

उनके बड़े भाई शिवदयाल बौंठियाल ने बताया कि शनिवार को अंतिम संस्कार हरिद्वार के चंडीघाट में दोपहर 1 बजे किया जाएगा। उनके निधन पर सीएम पुष्कर सिंह धामी समेत भाजपा नेताओं ने दुख जताया।

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दी श्रद्धांजलि

प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने
उनके निधन पर दुख जताते हुए कहा सरकार व संगठन में विभिन्न पदों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहन लाल बौंठियाल जी के निधन का समाचार स्तब्ध करने वाला है। वह उत्तराखंड भाजपा में पुरानी पीढ़ी के नेताओं में एक ऐसे व्यक्तित्व थे, वह हमेशा अपनी बेबाकी और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। उनका निधन पार्टी के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। उन्होंने हमेशा मृदुभाषी व सादगी के साथ अपना जीवन जिया। मुख्यमंत्री ने परिजनों को सांत्वना दी और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

भाजपा के वरिष्ठ नेता मोहनलाल बौंठियाल भाजपा के संस्थापको में से एक थे। सन 58 में वह बाल स्वयं सेवक के तौर पर संघ से जुड़ थे। 19 60 में वह फिर जनसंघ से जुड़े, फिर 19 77 में जनता पार्टी में वह 19 80 में भाजपा के सदस्य बने है। उत्तराखण्ड में भारतीय जनता पार्टी को एक पार्टी के तौर पर खड़ा करने में उन्होंने भी अपनी ओर से कठिन परिश्रम किया। पृथक उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी वह पार्टी के कई वरिष्ठ पदों पर रहे हैं। वह भाजपा में पंचायत प्रकोष्ठ व अनुशासन समिति के अध्यक्ष के अलावा कई बार गढ़वाल लोकसभा के प्रभारी व पालक भी रहे हैं। प्रदेश के अंदर भाजपा सरकार के समय वन निगम व जलागम प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रहे। विद्या भारती रामजन्मभूमि आंदोलन व राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका रही है। बताया जाता है कि व कई बार जेल भी गए। इतना ही नहीं आपातकाल में भी भूमिगत आंदोलन में सक्रिय रहे। राज्य बनने से पहले वह पर्वतीय विकास परिषद के सदस्य भी थे।

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