लोक रंगमंच के मजबूत स्तम्भ उर्मिल कुमार थपलियाल का निधन

लखनऊ से नावेद शिकोह व राजू मिश्र

लखनऊ।
लेखक- निर्देशक व रंगमंच जगत की जानी मानी शख्सियत डॉ० उर्मिल कुमार थपलियाल नहीं रहे।  मंगलवार शाम 5:30 लखनऊ स्थित निवास स्थान पर अंतिम सांस ली। अखबारों में उनकी नियमित नौटंकी खासी लोकप्रिय थी। वह मैदान में पहाड़ की पहचान थे।

नावेद शिकोह की कलम से


कला और अखबार को जोड़ने वाले मज़बूत सेतु उर्मिल कुमार थपलियाल नहीं रहे। नौटंकी विधा को व्यंग्य कॉलम का रूप देने वाले डा.थपलियाल एक ऐसे रंगकर्मी थे जिन्होंने भारत की नौटंकी की लोकशैली की संगीतमय प्रस्तुतियों को विश्व पटल पर सम्मान दिलाया। नौटंकी और उसके किरदार सूत्रधार, नटी-नटी जैसे चरित्रों के जरिए वो बड़े अखबारों में तमाम अलग-अलग शीर्षकों से वर्षों कॉलम लिखे।
रंगमंच और रेडियो को उन्होंने बहुत कुछ दिया। वो रेडियो के न्यूज सेक्शन मे भी रहे।
मेरा सौभाग्य रहा कि मेरे कई रेडियो नाटकों को उन्होंने निर्देशित किया। मेरा लिखा एंव डा. थपलियाल द्वारा निर्देशित एक गंभीर नाटक- ” एक नाम मिशा” राष्ट्रीय स्तर पर बहुत पसंद किया गया था। 2003 में ईटीवी मे भी मैं कुछ दिन के लिए उन्हें लाया था और हम लोगों ने चुनावी चर्चा के एक कार्यक्रम में रस पैदा करने वाला व्यंग्य सेगमेंट तैयार किया था।
हसरत थी कि थपलियाल जी के साथ कुछ काम करने का और मौका मिले।
मृत्यु के शाश्वत सत्य ने डा.उर्मिल कुमार थपलियाल की मौत के बुलावे का नगाड़ा बजा दिया और हसरतें टूट गईं।

उर्मिल कुमार थपलियाल को संगीत नाट्य अकादमी अवॉर्ड व यश भारती अवॉर्ड समेत कई पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।

वरिष्ठ पत्रकार गोविंद पंत राजू ने संवेदना प्रकट करते गए कहा कि लोक रंगमंच का एक स्तंभ ढह गया। खासे मिलनसार और मदद के लिए सदैव प्रस्तुत रहने वाले उर्मिल जी बहुत याद आएंगे।

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