विरासत- फिर चिपको की गौरा देवी ने दिया बलिदान,देखें वीडियो

रैणी गांव से बनाया जा रहा है वैकल्पिक मार्ग

स्वर्गीय गौरा देवी की मूर्ति पर चले हथौड़े

अविकल उत्त्तराखण्ड

रैणी, चमोली। विश्वप्रसिद्ध चिपको आंदोलन की प्रमुख सेनापति गौरा देवी ने एक बार फिर बलिदान दिया। तिब्बत बार्डर के निकट सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नीति पास को जोड़ने वाली यह सड़क अब नए सिरे से रैणी गांव से होकर बनाई जा रही है।

स्वर्गीय गौरा देवी की मूर्ति पर चले हथोड़े

शुक्रवार को बीआरओ ने रैणी गांव में स्थित गौरा देवी की मूर्ति व म्यूजियम को हटाने की कार्रवाई शुरू की थी। हालांकि, भारी बारिश के बीच ग्रामीणों ने प्रशासन व बीआरओ की कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस प्रशासन ने दो दिन के विरोध के बावजूद  शनिवार को गौरा देवी की मूर्ति हटाने के साथ म्यूजियम को भी ध्वस्त कर दिया।

गौरतलब है कि तिब्बत बॉर्डर को जोड़ने वाला नीति घाटी का महत्वपूर्ण मार्ग है। 6 फरवरी को यह मार्ग ऋषिगंगा में ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ में ध्वस्त हो गया था। अब यह मार्ग रैणी गांव से होकर बनाया जा रहा है। जिसके कारण गौरा देवी की मूर्ति व म्यूजियम को हटाया गया।

भूस्खलन की जद में आये रैणी गांव के खतरे में पड़े वजूद को देखते हुए लगभग 45 परिवारों के विस्थापन की कार्यवाही भी शुरू होने की उम्मीद है।  प्रशासन इस दिशा में होमवर्क में जुटी थी।

उल्लेखनीय है कि सत्तर के दशक में रैणी गांव की महिलाएं जंगल के ठेकेदारों के विरोध करते हुए पेड़ों से चिपक गई थी। सीमांत चमोली की ग्रामीण महिलाओं की इस गूंज की पूरे विश्व में सुनी गई। पर्यावरण की रक्षा में जुटे लोगों के लिए रैणी गांव एक प्रेरणा स्थल बन गया था।

रैणी गांव, भूस्खलन के मुहाने में

बीते 6 फरवरी को ऋषिगंगा नदी में ग्लेशियर टूट कर गिने से इस इलाके में भारी तबाही मची थी। रैणी गांव में भी जबरदस्त कटाव हुआ। तपोवन-रैणी इलाके में हुई तबाही के वाद गांव के विस्थापन का निर्णय लिया गया। विस्थापन की प्रक्रिया के तहत गौरा देवी की मूर्ति के विस्थापन की कार्रवाई भी शुरू हो गयी।

ऋषिगंगा व NTPC के पावर प्रोजेक्ट को नुकसान होने के अलावा सैकड़ों लोगों की जानें गई थी। ऋषिगंगा व धौलीगंगा ने रैणी-तपोवन इलाके में भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा में रैणी गांव के निवासियों को भी जान से हाथ धोना पड़ा था।

रैणी गांव के विस्थापन को लेकर भी सरकार जल्द ही कवायद शुरू करेगी। चिपको आंदोलन में विश्व प्रसिद्ध हुआ चमोली जिले का रैणी गांव अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा।

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