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..तो डॉ अनीता रावत के लिए फिर हो रही एक अदद कुर्सी की तलाश !

दून विवि, दून मेडिकल कॉलेज या फिर श्रीदेव सुमन विवि में हो सकती है ताजपोशी

अम्ब्रेला एक्ट आया तो बनी रह सकती हैं यूटीयू में भी

अदालत के निर्देश के बाद हटीं थी डॉ अनीता यूटीयू के कुलसचिव पद से

त्रिवेंद्र सरकार में मजबूत पकड़ के चलते उच्च शिक्षा से यूटीयू में हुई थी ताजपोशी

अविकल उत्तराखण्ड

देहरादून।
नैनीताल उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्तराखण्ड तकनीकी विवि के रजिस्ट्रार पद से हटाई गई डॉ अनीता रावत अपने मूल विभाग में जाएंगी या फिर किसी अन्य विवि में रजिस्ट्रार बनेंगी। इस सवाल के कई जवाब तलाशे जा रहे हैं। शासन स्तर पर राज्य के अधीन विवि में अदद कुर्सी की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

इनमें दून विवि, दून मेडिकल विवि व श्रीदेव सुमन विवि का नाम लिया जा रहा है। हालांकि, श्रीदेव सुमन विवि का मुख्यालय चंबा में है लेकिन कैम्प कार्यालय ऋषिकेश में है। जबकि दून विवि व दून मेडिकल कालेज के मुख्यालय देहरादून में है।

दून विवि, देहरादून

फिलहाल, त्रिवेंद्र सरकार के सामने दो विकल्प बचते है। पहला यह कि डॉ अनीता रावत को उनके मूल उच्च शिक्षा विभाग में भेज दिया जाय (संभावना बेहद कम) और वहां डॉ अनीता कूलिंग पीरियड गुजारने के बाद फिर से डेपुटेशन पर किसी विवि की अहम कुर्सी संभाले। लेकिन इस प्रक्रिया में थोड़ा ज्यादा समय लग जाता है। दरअसल, डेपुटेशन के बाद अपने मूल विभाग में गए अधिकारी-कर्मचारी को एक निश्चित अवधि अपने विभाग में बितानी पड़ती है। यह पीरियड 6 माह से 1 साल तक बताया जा रहा है।

लिहाजा, डॉ अनीता रावत को मूल विभाग में भेजने और कूलिंग पीरियड के इंतजार में काफी समय खर्च होने की संभावना है। ऐसे में एक अन्य रास्ते को अपनाया जा सकता है। चूंकि, अदालत ने अनीता रावत के कार्यों पर रोक लगाते हुए कुलसचिव के पद से हटाया है। लेकिन डेपुटेशन बरकरार रखने का फैसला शासन को ही करना है। और त्रिवेंद्र सरकार में मजबूत पकड़ के चलते अनीता रावत को कोई परेशानी पेश नही आएगी।

समझा जाता है कि डॉ अनीता रावत को दून विवि, दून मेडिकल कालेज या फिर श्रीदेव सुमन विवि का रजिस्ट्रार बना दिया जाय। चूंकि, उच्च स्तर पर पकड़ होने के कारण डॉ अनीता रावत  को मूल विभाग में भेजे जाने की संभावना बहुत कम ही है। ऐसे में किसी अन्य विवि का रजिस्ट्रार बनना ज्यादा मुफीद लग रहा है।

उत्तराखण्ड सचिवालय। इसी बिल्डिंग से शासनव सरकार दोनों चलती है। सभी शासनादेश इन्हीं कमरों से निकलते हैं।नवंबर 2017 में जंतु विज्ञान की लेक्चरर डॉ अनीता रावत उच्च शिक्षा विभाग से डेपुटेशन पर यूटीयू में रजिस्ट्रार बनी थी। उच्च शिक्षा विभाग से NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) मिली भी थी या नही। यह भी बहुत साफ नही हो पाया। ताज्जुब की बात यहभी रही कि अपर मुख्य सचिव के 20 अगस्त के आदेश की प्रतिलिपि निदेशक उच्च शिक्षा को भी नही की गई है। (देखें लिंक)

इसके अलावा अगर सरकार अम्ब्रेला एक्ट ले आती है तो सम्भवतः डॉ अनीता रावत यूटीयू फिर से स्थापित हो जाएं। क्यों कि अम्ब्रेला एक्ट में बीटेक की डिग्री या फिर रजिस्ट्रार बनने के लिए पांच साल के प्रशासनिक अनुभव आदि मानकों की बाध्यता भी खत्म हो सकती है। त्रिवेंद्र सरकार बहुत जल्दी अम्ब्रेला एक्ट लाये जाने की कोशिश में जुटी भी है।  शासन स्तर पर अम्ब्रेला एक्ट की प्रक्रिया बेहद तेज गति से चल भी रही है। कुछ दिन के अंदर फैसला होने की उम्मीद भी है।

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