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अरे बाबा कब होगा विधायक जी का डीएनए… कब होंगे पीड़िता के 164 के बयान। uttarakhand sex scandal

द्वाराहाट से भाजपा विधायक महेश नेगी पर 5 सितम्बर को हो चुका है बलात्कार का मुकदमा

पुलिस जांच में साफ झलक रही सत्ता की हनक

उगाही, ब्लैकमेलिंग, सिपाही हरिओम, पीड़िता के पूर्व पति के बयान, पितृत्व जांच रिपोर्ट डीएनए में उलझी पुलिस

विधायक व पीड़िता के नेपाल,दिल्ली,मसूरी व हल्द्वानी यात्रा के तथ्यों की जांच व स्थलीय निरीक्षण (विधायक हॉस्टल देहरादून) कब शुरू करेगी पुलिस

अविकल उत्त्तराखण्ड


देहरादून।
सेक्स स्कैंडल-  उत्त्तराखण्ड के भाजपा विधायक बलात्कार के मुकदमे में फंसे हैं और पीड़िता ब्लैकमेलिंग व उगाही के मुकदमे में। लेकिन बीते एक महीने की जांच में देहरादून पुलिस का मुख्य फोकस ब्लैकमेलिंग व उगाही की जांच पर ज्यादा दिख रहा है।

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भाजपा विधायक महेश नेगी। सत्ता की हनक व धमक पूरी बनी हुई।

इस हाईप्रोफाइल सेक्स स्कैंडल में देहरादून पुलिस पीड़िता के 164 के बयान कब दर्ज करेगी। और बच्ची व विधायक के पितृत्व जांच कब होगी। तीन-तीन जांच अधिकारी बदले जाने व बलात्कार का मुकदमा दर्ज होने के बावजूद बावजूद पुलिस 164/डीएनए जांच पर ठोस तरीके से आगे बढ़ती हुई नहीं दिख रही। गुरुवार की रात तक पीड़िता को यह भी साफ नहीं हो पाया कि जांच अधिकारी ने सीजेएम कोर्ट में 164 के बयान के लिए कोई प्रार्थना पत्र दया भी है कि नहीं। जबकि कई अन्य मुद्दों पर पुलिस की जांच की दिशा ही मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है। अब तक हुई पुलिस जांच में सत्ता की हनक व धमक भी साफ सुनायी दे रही है। बाल आयोग और महिला आयोग के नोटिस भी बलात्कार के इस चर्चित मामले में बड़ी खबर बन रहे हैं।

इस बीच, कोर्ट के डंडे के बाद 5 सितम्बर को बलात्कार का मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़िता का मेडिकल टेस्ट भी हो गया। इस बीच, हरिद्वार पुलिस लाइन में तैनात सिपाही हरिओम का सनसनीखेज ऑडियो (पीड़िता को आपबीती बताते हुए) भी सामने आ गया। जिसमें सीधे तौर पर द्वाराहाट के विधायक महेश नेगी व दूसरे भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के गनर पर विधायक निवास में मारपीट कर पीड़िता के खिलाफ वीडियो बयान दिलवाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस अब इस मुद्दे पर विशेष ध्यान केंद्रित किये हुए है। मसलन उस सिपाही के बयान लेने। लेकिन ऑडियो में आरोपी विधायक व गनर से कोई पूछताछ हुई या नही। दून पुलिस ने यह बात अभी तक ब्रीफ नही की।

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इधर, एक जांच अधिकारी का पीड़िता को बार बार यह पूछना कि सिपाही हरिओम से आपकी किस नंबर पर बात हुई। आदि आदि। लेकिन बलात्कार के दर्ज मुकदमे के विषय में जांच अधिकारी न तो अभी तक मजिस्ट्रेटी बयान ही करवा पाए और न ही पीड़िता को मसूरी के कैम्पटी व देहरादून के विधायक निवास का ही स्थलीय निरीक्षण ही करवा सके। जहां विधायक पीड़िता को लेकर गया था। नेपाल, दिल्ली और हल्द्वानी का स्थलीय निरीक्षण तो बहुत दूर की बात है।

इन स्थानों के होटलों के साक्ष्य वीडियो फुटेज, काल डिटेल रजिस्टर व अन्य दस्तावेज भी देहरादून पुलिस को लेने है लेकिन आखिर कब? जब सब तथ्य मिटा दिए जायँ। लेकिन देहरादून पुलिस काफी दिन से 5 करोड़ की उगाही आदि मुद्दों पर खर्च कर रही है । मसलन, पीड़िता के पूर्व पति के बयान लेने के लिए उसके यूनिट कमांडर को पत्र भेजे जा रहे।  डीएनए शामली में हुआ तो रजिस्टर में दर्ज क्यों नहीं। फिर डीएनए रिपोर्ट को सवालिया घेरे में ले लिया जाता है। जबकि पीड़िता पूर्व में ही अपनी तहरीर में दिल्ली की फ़ॉरेंसिक लैब का पता दे चुकी है। डीएनए रिपोर्ट के बाबत दिल्ली फ़ॉरेंसिक लैब में पुलिस गयी कि नहीं, यह बात मीडिया को नही पता। इन्ही मुद्दों पर पुलिस भटक रही।

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एक पुष्ट जानकारी यह भी सामने आयी है कि शामली से लौटने के बाद पुलिस के एक अधिकारी फोरेंसिक लैब को अपनी निजी मेल से डीएनए रिपोर्ट के बाबत बार बार जानकारी मांग रहे हैं लेकिन लैब प्राइवेट मेल आईडी पर कोई जवाब नही दे रही है। अगर पुलिस की आधिकारिक मेल से जानकारी मांगी जाएगी तो फ़ॉरेंसिक लैब जरूर जिज्ञासा शांत करेगी।

बहरहाल, अब तक के घटनाक्रम से साफ पता लग रहा है कि देहरादून पुलिस पीड़िता पर दर्ज मुकदमे की शिद्दत से जांच (सिपाही हरिओम प्रकरण भी) कर  रही है। लेकिन 376 व 506 धाराओं में सत्ताधारी माननीय महेश नेगी पर दर्ज मुकदमे पर दून पुलिस कब अंगड़ाई लेगी ? कब मजिस्ट्रेट महोदय के सामने पीड़िता के 164 के बयान होंगे और कब भाजपा विधायक महेश नेगी व बच्ची के पितृत्व -डीएनए जांच होगी? और कब सच्चाई सामने आएगी?कब मामले का पटाक्षेप होगा?

यही नही बाल आयोग किसी हरि सिंह को शिकायत पर पीड़िता को लगातार समन भेजे जा रहे हैं। सच्चाई यह है कि कोई भी व्यक्ति निजी तौर पर प्राइवेट प्रयोगशाला में DNA प्रोफाइल बनवा सकता है। पितृत्व जांच करवा सकता है। सिर्फ पति पत्नी या पारिवारिक विवाद में कोर्ट के आदेश पर डीएनए व पितृत्व जांच सरकारी फ़ॉरेंसिक लैब में की जाती है।

लेकिन पीड़िता की मांग पर बच्ची व भाजपा विधायक महेश नेगी के शीघ्र पितृत्व जांच के नही हो रहे हैं। महिला आयोग के नोटिस भी पीड़िता को जा रहे हैं। इस मामले में जब तक ठोस परिणाम सामने लाने का बजाय लीपापोती की कोशिश होती रहेगी तब तक भाजपा को कांग्रेस, आप व अन्य दलों के हमले झेलते रहने पड़ेंगे।

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