फरमान- रिटायर कर्मियों के संघ में बतौर पदाधिकारी पर शासन सख्त

कार्मिक सचिव अरविंद ह्यांकी के आदेश से कर्मचारी संघों में बेचैनी

ऐसे सेवा संघों की मान्यता समाप्त कर दी जाएगी

रिटायर कर्मियों के संघों में पदाधिकारी होना सेवा संघों को मान्यता नियमावली, 1979 के अनुरूप नहीं है।

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून। शासन के नये आदेश के मुताबिक अगर मान्यता प्राप्त सेवा संघ में सेवानिवृत्त कार्मिक संघ के कार्यकलापों में सम्बद्ध होंगे तो उन संघों की मान्यता समाप्त कर दी जाएगी। सचिव अरविंद ह्यांकी के 7 सितम्बर के ताजा आदेश में साफ कहा गया है कि ऐसे संघों की मान्यता समाप्त किये जाने का प्रस्ताव यथाशीघ्र कार्मिक एवं सतर्कता विभाग को उपलब्ध कराया जाय। यह भी कहा है कि रिटायर कर्मियों के संघों में पदाधिकारी होना सेवा संघों को मान्यता नियमावली, 1979 के अनुरूप नहीं है।

इस आदेश के बाद कर्मचारी संघों में अफरा तफरी देखी जा रही है।

पत्र की प्रति शासन के अधिकारियों, डीएम व विभाध्यक्ष व आयुक्त को आवश्यक कार्यवाही के लिए भेजी गयी है।

सचिव अरविंद ह्यांकी के आदेश की मूल भाषा

विषय सेवा संघों/ परिसंघों को मान्यता दिये जाने के सम्बन्ध में।

महोदय,

उपरोक्त विषयक सम्बन्ध में उ0प्र0 सेवा संघों को मान्यता नियमावली, 1979 (यथा उत्तराखण्ड राज्य में प्रवृत्त) एवं तत्कम में निर्गत शासनादेश संख्या 166 / कार्मिक-2 / 2002 दिनांक 28 फरवरी, 2002 द्वारा सेवा संघों को मान्यता नियमावली के नियम-5 (ग). (ड.) एवं (च) में निम्न प्राविधान है :

(ग) संघ की सदस्यता कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के (जिसके अन्तर्गत सेवानिवृत्त कर्मचारी नहीं है) एक सुभिन्न प्रवर्ग तक सीमित हो और इसमें उस विशिष्ट प्रवर्ग की कुल सदस्य संख्या के 50 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व हो।’

(ड) कोई ऐसा व्यक्ति जो कार्यरत सरकारी सेवक न हो, संघ के कार्यकलापों से सम्बद्ध न हो।

(च) पदाधिकारी जिसके अन्तर्गत संघ के कार्य समिति के सदस्य भी है, केवल उसके सदस्यों में से ही (सेवानिवृत्त कर्मचारियों को छोड़ते हुए) नियुक्त किये जायेंगे।

2 शासन के संज्ञान में आया है कि राज्याधीन सेवाओं में विभिन्न सेवा संवर्गों के अन्तर्गत गठित संघों / परिसंघों / महासघों में सेवानिवृत्त कार्मिक संघ के सदस्य एवं संघ के पदाधिकारी के रूप में संघ के कार्यकलापों से सम्बद्ध हैं, जो कि सेवा संघों को मान्यता नियमावली, 1979 के अनुरूप नहीं है।

3- इस सम्बन्ध में कार्मिक एवं सतर्कता विभाग के परिपत्र संख्या 385/XXX(2)/2017 03 (9)/2012 दिनांक 26.12.2017 एवं संख्या 25 XXX (2) 2019-03 (9)/2012 दिनांक 15.02.2019 के क्रम में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि अपने नियंत्रणाधीन विभागों के सेवा संघों / परिसंघों / महासंघों में यह सुनिश्चित किया जाय कि किसी भी मान्यता प्राप्त सेवा संघ में सेवानिवृत्त कार्मिक संघ के कार्यकलापों में सम्बद्ध हों तो उन संघों की मान्यता समाप्त किये जाने का प्रस्ताव यथाशीघ्र कार्मिक एवं सतर्कता विभाग, उत्तराखण्ड शासन को उपलब्ध कराया जाय।

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