मुद्दे हल नहीं होने पर राज्य कर सेवा संघ ने जताई नाराजगी

‘अधिक कार्य-अधिक स्वीकार्य’ के नारे से सक्रिय सत्याग्रह करेगा राज्य कर सेवा संघ। अधिकारी-कार्मिक संयुक्त मोर्चे के तत्वाधान में संघर्ष की रणनीति बनाए जाने का निर्णय

अविकल उत्तराखंड

देहरादून । उत्तराखण्ड के राज्य जीएसटी अधिकारियों के प्रांतीय संगठन, राज्य कर सेवा संघ की वार्षिक बैठक रिंग रोड स्थित एक होटल में संपन्न हुई. बैठक में विभाग और संगठन के समक्ष उपस्थित समस्याओं और चुनौतियों पर विचार किया गया.

बैठक का संचालन करते हुए सेवा संघ के महासचिव जयदीप सिंह रावत द्वारा कार्यसूची प्रस्तुत की जिसमें विभागीय संरचानात्मक पुनर्गठन, विभाग में स्थानांतरण ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किए जाने, राज्य कर अधिकारियों की वेतन विसंगति प्रकरण, विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर व राज्य कर अधिकारियों के सामान्य व निरीक्षकों हेतु आरक्षित पदों पर विलंबित पदोन्नतियों की प्रक्रिया को गति प्रदान किए जाने, विभाग में कार्मिकों और उपकरणों की कमी दूर किए जाने, आयुक्त कर और राज्य कर मुख्यालय के मनमाने रवैये के विरोध और राज्य कर अधिकारियों की नियमावली जारी किए जाने जैसे विषयों पर चर्चा का प्रस्ताव किया गया.

अपने उद्बोधन में सेवा संघ अध्यक्ष यशपाल सिंह द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि इस माह से राज्य को केंद्र ओर से गत पांच वर्षों से मिलती चली आ रही जीएसटी प्रतिपूर्ति समाप्त होने से एकाएक चालू वित्तीय वर्ष के राज्य के राजस्व में पांच हजार पांच सौ करोड़ की गिरावट की आशंका है, किन्तु इस दिशा में कोई निदानात्मक उपाय नहीं किए जा रहे हैं. इसके लिए विभाग में संरचात्मक पुनर्गठन, पदोन्नतियाँ, कार्मिकों और उपकरणों की कमी दूर किया जाना अपरिहार्य है,

किन्तु विभाग अथवा शासन की ओर से इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है, इससे अधिकारियों में रोष है. विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया बाधित है और राज्य कर अधिकारियों की नियमावली काफी समय से लंबित है. इसले अतिरिक्त स्थानांतरणों की गत चार वर्षों से स्थापित ऑनलाइन प्रक्रिया, जो कि पारदर्शी व वस्तुनिष्ठ है, को समाप्त किए जाने की आशंका से भी सदस्यों में नाराजगी है. इन विषयों पर त्वरित निर्णय और कार्यवाही न किए जाने की स्थिति में संघर्ष की राह अपनाना सेवा संघ की बाध्यता है.

इन मामलों पर अधिकारी-कार्मिक संयुक्त मोर्चे के तत्वाधान में संघर्ष की रणनीति बनाए जाने का निर्णय लिया गया. उक्त विषयों पर शीघ्र ही त्वरित कार्यवाही न होने की दशा में सेवा संघ सदस्यों के मध्य जाग्रति अभियान चलाकर अधिकारियों द्वारा क्षमता से अधिक काम करते हुए सक्रिय विरोध की रणनीति- ‘सक्रिय सत्याग्रह’ अपनाए जाने व इस पर अमल करने पर भी विचार किया गया.

बैठक में कार्यकारिणी सदस्यों के अतिरिक्त अविनाश झा, संजीव त्रिपाठी, राजेंद्र सिंह बडवाल आदि द्वारा विचार व्यक्त किए गए. बैठक में सामान्य सदस्यों के अलावा संघ की कार्यकारिणी के सदस्य रघुबीर सिंह चौहान, रविंद्र सिंह बसेड़ा, सुधीर चंदोला, महेशचंद, ध्यान सिंह रावत तथा श्री चंद्रप्रकाश शर्मा द्वारा प्रतिभाग किया गया.

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