रोडनी मार्श को भी याद करिए, जिन्होंने कीपिंग को चैलेंज बना दिया

संजय श्रीवास्तव

ना जाने जीनियस और असाधारण हस्तियों में बिगडैल तत्व भी होता है. खेलों में खासतौर पर. शेन वार्न के निधन पर यही सवाल दिमाग में उभरा-इतने जीनियस और मेघा वाले क्रिकेटर का अंत इतनी जल्दी कैसे. वार्न ने क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजी को नई ऊंचाई दी तो वो हमेशा बेफिक्र अंदाज में रहे. दुनिया जो कहती है कहती रहे लेकिन उन्हें चलना अपने तरीके से ही है. वो केवल क्रिकेट और गेंदों के साथ बल्लेबाजों से ही फिरकी के जरिए नहीं खेले बल्कि खुद से भी खेलते रहे.
उनका स्थायी तत्व ऐसा फक्कड़ और मनमौजीपन था, जो दुनिया की नजर में उन्हें बिगडैल बॉय की इमेज में कैद कर चुका था. ये बड़ा सवाल है कि क्या उनकी अराजक जिंदगी उन्हें इतनी जल्दी भगवान के पैवेलियन में ले गई.

वैसे शेन वार्न और मेराडोना में गजब का साम्य था. दोनों गजब के टैलेंटेड और महान. दोनों नियमों में कभी नहीं बंधे. दोनों नशे से लेकर हर बुरे व्यस्न में नजर आए. दोनों के ही ना जाने कितने एक्स्ट्रा मेरिटल रिलेशन. दोनों ही सिस्टम की आंखों की किरिकिरी. वार्न केवल इसीलिए कप्तान नहीं बन पाए, क्योंकि उनकी रंगीनमिजाजी और अनुशासनहीनता उन्हें ले डूबी.

टैलेंट और महानता को संभालने का बोझ भी इतना भारी होता है कि सबसे नहीं संभलता. अगर कोई खिलाड़ी या शख्सियत महान होती है तो हम सब उसमें सारे आदर्श क्यों टटोलने लगते हैं.

खैर वार्न की चर्चाओं के बीच रोडनी मार्श को नहीं भूलना चाहिए. जो 70 और 80 के दशक की स्वर्णिम दौर वाली दमदार आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के बिग फोर में एक थे. बिग फोर मतलब इयान चैपल, ग्रैग चैपल, डेनिस लिली और रोडनी मार्श. दिलदार क्रिकेटर और दिलदार शख्सियत. कहा जा सकता है कि क्रिकेट इतिहास में उन जैसा महान विकेटकीपर अब तक नहीं हुआ. वोअपने समय से दो सबसे खूंखार गेंदबाजों डेनिस लिली और जैफ थामसन की गेंदों को ग्लब्स की दीवार बनाकर झेलते थे. आस्ट्रेलिया के इस क्रिकेटर को पहले ही टेस्ट में आयरन ग्लव्स का निकनेम मिला.

घनी मूछों वाले रोडनी मार्श कद्दावर कदकाठी के थे. शुरू में उनका भारीभरकम होना आलोचना का विषय भी बना. लेकिन बाद में उन्होंने अपना वजन बहुत कम किया. कंपटीटीव आस्ट्रेलियाई नेचर उनमें कूट-कूटकर भरा था. अगर वो तीन साल के लिए कैरी पैकर सर्कस में नहीं गए होते तो उनके खाते में और ज्यादा कैच, स्टंप और विकेट होते. विकेट इसलिए लिख रहा हूं,क्योंकि वो ऐसे विकेटकीपर थे, जिन्होंने बॉलर के तौर पर टेस्ट क्रिकेट में 72 विकेट भी लिए थे, जो कोई विकेटकीपर नहीं कर सका. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 343 कैच और 12 स्टंप किए.

मार्श को जब टीम में लिया गया तो सेलेक्टर्स की जमकर आलोचना हुई, माना गया कि मार्श के पास कीपिंग क्षमता कम और बैटिंग स्किल ज्यादा. लेकिन जल्दी ही उन्होंने एनर्जी, चपलता, एनर्जी, एथलेटिक अंदाज और बला की तेजी से विकेटकीपिंग की परिभाषा बदल दी. विकेट के पीछे कीपिंग का स्टैंर्डड इतना बढ़ाया कि बाद के कीपर्स के लिए चैलेंज हो गया. मार्श विकेट के पीछे मैदान का इतना बड़ा हिस्सा कवर कर लेते थे कि थे कि खुद उनके टीम के खिलाड़ी हैरान हो जाते थे.

पहले टेस्ट के बाद से ही वह अपनी टीम से फेविकोल की तरह चिपक गए. टीम में उनका नाम तो पक्का होता था, भले कोई और अंदर – बाहर होता रहे. कहा जाता है कि डेनिस लिली को जितने विकेट तेज गेंदबाजी से मिले उसमें मार्श की टिप्स का बड़ा योगदान था. सुनील गावस्कर ने अपनी किताब आइडल्स में लिखा वो अकेले ऐसे खिलाड़ी थे जो ड्रेसिंग रूम में तौलिया बांधे नजर आते थे. उनके भाई दिग्गज ग्राहम मार्श दिग्गज गोल्फर थे, जिन्होंने 09 बार से ज्यादा यूरोपीय टूर जीता था, हालांकि रोडनी जितनी उम्दा क्रिकेट खेलते थे उतनी ही शानदार गोल्फ. आखिर एक समय उन्हें चुनना पड़ा था कि वो गोल्फ खेलें या क्रिकेट.
1970 में आस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम में आए रोडनी मार्श 80 के दशक के बीच में रिटायर हो गए. शायद वह दुखी भी थे कि उन्हें कप्तान क्यों नहीं बनाया गया. 74 साल की उम्र तक वह भरपूर जिए. क्रिकेटर की जिंदगी के बाद क्रिकेट की मैदान से बाहर की बड़ी भूमिकाओं में रहे. बस वह अपने लंबे करियर में कभी क्रिकेट खेलने भारत नहीं आए.

जाने माने पत्रकार -लेखक संजय श्रीवास्तव

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