महिला आईएएस प्रेमलाल की 60 बीघा जमीन की पावर अटॉर्नी का मामला

हाईकोर्ट ने खारिज की मक्खन सिंह की याचिका

मक्खन सिंह ने याचिका में कहा कि 60 बीघा जमीन पर कब्जा दिलाया जाय

अविकल उत्तराखण्ड

नैनीताल। देहरादून जिले के रानीपोखरी स्थित रैनापुर ग्रांट मौजा में पूर्व महिला आईएएस प्रेमलाल से संबंधित 60 बीघा जमीन के मामले में नया मोड़ आ गया है।

नैनीताल हाईकोर्ट ने इस जमीन की पावर अटॉर्नी का दावा करने वाले मक्खन सिंह की याचिका को खारिज कर दिया।

60 बीघा जमीन पर कब्जा दिलाये जाने को लेकर मक्खन सिंह ने पहले दून जिला प्रशासन और फिर नैनीताल हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में मक्खन सिंह ने जमीन पर कब्जा दिलाये जाने की मांग की । इस प्रकरण से सम्बंधित मुकदमा ऋषिकेश SDM कोर्ट में भी चल रहा है।

हाईकोर्ट के जज रविन्द्र मैठाणी ने अपने फैसले में जमीन से सम्बंधित चल रहे मुकदमे का जिक्र करते हुए मक्खन सिंह की याचिका को निरस्त कर दिया।

गौरतलब है कि राजस्व अभिलेखागार से आईएएस प्रेमलाल की 60 बीघा जमीन के दस्तावेज गायब होने के मामले की भी जांच चल रही है।

क्या है आईएएस प्रेमलाल की 60 बीघा जमीन का सच

देहरादून के जमींदार राजा चंद्र बहादुर सिंह के पास कुई गांवों में काफी जमीन थी। जमींदारी एक्ट लागू होने के बाद जब सरकार ने अतिरिक्त जमीनों पर कब्जा लेना शुरू किया तो चंद्र बहादुर ने   60 बीघा जमीन मौसेरी बहन आईएएस अफसर सुश्री प्रेमलाल को दान में दे दी। यह बात 1972 की है। उस वक्त वह कर्नाटक में तैनात थीं। वह 70 के दशक की आईएएस अधिकारी थीं। आईएएस प्रेमलाल दून में भी रहीं।
यह जमीन कई साल तक उनके नाम रही। रिटायरमेंट के बाद  प्रेमलाल दिल्ली में निजामुद्दीन ईस्ट स्थित अपने मकान में रहने लगीं।

अब करीब 50 साल बाद अचानक पीलीभीत के मक्खन सिंह एक पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर प्रशासन के सामने उपस्थित हुए। और दावा किया कि प्रेमलाल ने वर्ष 1984 में 60 बीघा जमीन उनके पिता कश्मीर सिंह के नाम पावर ऑफ अटार्नी कर दी थी। बाद में कश्मीर सिंह ने अपने बेटे के नाम इसकी पावर ऑफ अटॉर्नी कर दी।

इसलिए जमीन पर उन्हें कब्जा दिलाया जाए। इस जमीन पर किसी और ने कब्जा कर लिया। कुछ लोगों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया। इस भूमि विवाद का मुकदमा भी चल रहा है।

गौरतलब है कि इस जमीन को मुख्तारनामे के माध्यम से बेचा जा चुका है। पीलीभीत के कुछ लोगों ने प्रेमलाल का मुख्तारेआम बनकर जमीन का बैनामा किया था।

मामले की जांच से पता चला कि संबंधित बैनामा जिस जिल्द में रखा था उसके कुछ कागजात फाड़ दिए थे । और फिर नकली पेपर लगा दिए गए थे।

ऐसे ही कुछ और फर्जी मामले पकड़े गए तो  कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया ।

पूर्व महिला आईएएस प्रेमलाल की जमीन के कागजात भी राजस्व रिकॉर्ड रूम से गायब

देहरादून जिले में हुए जमीनों के फर्जी बैनामे को लेकर जांच भी चल रही है। कई जमीनों की वास्तविक पत्रावलियाँ रिकॉर्ड रूम से गायब हो चुकी हैं। और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से बीते कई सालों से  जमीनों की खरीद फरोख्त का खेल चल रहा है।

हाल ही में देहरादून की जमीनों के दस्तावेज गायब होने पर सीएम धामी ने भी रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया।

रजिस्ट्री कार्यालयों में बैनामों से छेड़छाड़ के बाद पता चला कि रैनापुर ग्रांट मौजा स्थित पूर्व महिला आईएएस प्रेमलाल से संबंधित जमीन के दस्तावेज भी राजस्व रिकॉर्ड रूम से गायब हैं। इस संबंध में भी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है।


यह भी सवाल उठ रहा है कि आईएएस प्रेमलाल ने पीलीभीत के किसी व्यक्ति को पावर ऑफ अटॉर्नी क्यों दी। यह भी जांच के घेरे में है। इसके अलावा राजस्व अभिलेखागार से फाइल गायब होने के पीछे भू माफिया का खेल तो नहीं, यह सवाल भी उठ रहा है।

1984 के स्टांप चोरी का मसला फिर गरमाया

1984 में देहरादून में फर्जी स्टांप बेचने के मामले में  पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं स्टांप चोरी का लाभ उठाकर कोई गलत पावर ऑफ अटॉर्नी दिखाकर इस जमीन को अपने नाम तो नहीं कराना चाहता।

चंद्र बहादुर के पास थी हजारों बीघा जमीन

देहरादून के आसपास कई गांवों में चंद्र बहादुर की हजारों बीघा जमीन थी।  उनके पिता कर्नल शमशेर बहादुर दून की धर्मपुर, रायपुर, लाडपुर, नत्थनपुर, रैनापुर, बक्सरवाला, डोईवाला समेत कई गांवों में जमीनें थीं। जमींदारी एक्ट के बाद  जब अतिरिक्त जमीनों का सरकारें अधिग्रहण करने लगीं तो जमींदार अपने रिश्तेदारों को जमीनें दान करने लगे।


Total Hits/users- 30,52,000

TOTAL PAGEVIEWS- 79,15,245

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *