..तो बदरीनाथ कंसर्ट के लिए सेना ने नहीं ली थी इजाजत

चमोली के डीएम ने कर्नल को पत्र भेज दी हिदायत और मांगा जवाब

पढ़ें, डॉ मुरली मनोहर जोशी की आपत्ति से मची हलचल

बदरीनाथ में सांस्कृतिक महोत्सव पर विवाद गहराया

धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन पर ज्योतिर्मठ और तीर्थ पुरोहित महापंचायत की आपत्ति

  कांग्रेस व उक्रांद ने उठाए सवाल

अविकल उत्तराखंड

गोपेश्वर। दस हजार फीट लर स्थित आस्था के प्रतीक बदरीनाथ धाम के डीजे कंसर्ट के शोर से बात निकली और दूर तक चली भी गयी। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी व धार्मिक संस्थाओं की घोर आपत्ति के बाद राजनीतिक व धार्मिक क्षेत्र में हलचल मची हुई है।

इस बीच, चमोली के डीएम गौरव कुमार ने सेना/गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग अफसर कर्नल शांतनु से हिदायत भरा पत्र भेज जवाब तलब कर लिया। यह भी पूछा है कि इस आयोजन के लिए क्या सक्षम स्तर से अनुमति ली गयी थी।

बात 19/20 सितंबर को बदरीनाथ धाम में हुए कल्चरल कार्यक्रम में प्रदेश की गायिका प्रियंका मेहर के डीजे कंसर्ट विवाद से जुड़ी हुई है।
बदरीनाथ धाम में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026 के दौरान तेज संगीत, डीजे और नृत्य के वीडियो सामने आने के बाद विवाद गहरा गया है।
धार्मिक संस्थाओं और विपक्षी दलों की आपत्तियों के बीच चमोली के जिलाधिकारी ने आयोजन को लेकर सेना से स्पष्टीकरण मांगा है।
जिलाधिकारी कार्यालय से 23 सितंबर को गढ़वाल स्काउट के कमांडिंग ऑफिसर को भेजे पत्र में आयोजन की अनुमति, कार्यक्रम के स्वरूप और उसमें उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल के कारणों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही भविष्य में बदरीनाथ धाम में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं होने को सुनिश्चित करने को कहा गया है।


पत्र में कहा गया है कि बदरीनाथ धाम धार्मिक आस्था का केंद्र और पवित्र स्थान है। ऐसे स्थान पर इस प्रकार के सामूहिक आयोजन और उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम का प्रयोग धाम की गरिमा के विपरीत है तथा इससे पूजा-अर्चना पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जिलाधिकारी ने पूछा है कि कार्यक्रम के आयोजन के लिए सक्षम स्तर से क्या अनुमति प्राप्त की गई थी और उच्च ध्वनि वाले साउंड सिस्टम के प्रयोग का क्या कारण था।
दरअसल, 19 और 20 सितंबर को बदरीनाथ के टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में भारतीय सेना के ऑपरेशन सद्भावना के तहत चमोली जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग के सहयोग से देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल आयोजित किया गया था।
आयोजन का उद्देश्य लोक संस्कृति, सीमांत गांवों की परंपराओं, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा देना बताया गया था। प्रशासन के अनुसार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का चयन और उनका स्वरूप सेना की ओर से तय किया गया था।

गायिका प्रियंका मेहर

धार्मिक संस्थाओं ने जताई आपत्ति

कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने आपत्ति जताई है। महापंचायत के महासचिव बृजेश सती ने कहा कि विरोध सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन से नहीं, बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुतियों से है। ज्योतिर्मठ से जुड़े संतों ने भी बदरीनाथ की धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।

डॉ मुरली मनोहर जोशी बोले- पवित्रता पर सीधा आघात

विवाद के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी बदरीनाथ में संगीत समारोह और डीजे आयोजन पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि पवित्र स्थल पर ऐसे आयोजन की अनुमति सांस्कृतिक मर्यादा के उल्लंघन के साथ धाम की पवित्रता पर आघात है।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से ऐसे आयोजनों पर रोक लगाने तथा बदरीनाथ की धार्मिक गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया है। जोशी ने बदरीनाथ की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां शंख बजाने तक की मनाही है, वहां शोर-शराबे वाले संगीत कार्यक्रमों पर विचार किया जाना चाहिए।
कांग्रेस और उक्रांद ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस ने बदरीनाथ जैसे तीर्थस्थल पर मनोरंजनात्मक आयोजनों की सीमा और धार्मिक पर्यटन के व्यवसायीकरण को लेकर सवाल उठाए हैं।
उत्तराखंड क्रांति दल ने इस मामले में गोपेश्वर में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका और धाम की धार्मिक मर्यादा के अनुरूप आयोजनों की मांग की।
अब डीएम के पत्र के बाद विवाद का केंद्र यह बन गया है कि आयोजन की अनुमति किस स्तर से दी गई, कार्यक्रम का स्वरूप किसने तय किया और धार्मिक रूप से संवेदनशील बदरीनाथ धाम में ध्वनि व मनोरंजन संबंधी मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ। भविष्य में विशेष बातों का ध्यान रखा जाय…

कर्नल शान्तनू,

कमॉडिंग आफिसर,

गढ़वाल स्काउट, द्वारा-56 ए०पी०ओ०

पिन-910700 1

कृपया विभिन्न संचार / सोशल मीडिया के माध्यम से अधोहस्ताक्षरी को ज्ञात हुआ है कि आपके द्वारा श्री बद्रीनाथ धाम में वृहद कल्चरल फेस्टिवल कार्यकम आयोजित किया गया, जिसमें काफी संख्या में भीड़ एकत्रित हुई तथा कार्यक्रम में उच्चावृत्ति के साउण्ड सिस्टम का उपयोग किया जाना विदित हुआ है। आप स्वयं ही अवगत होंगे कि श्री बद्रीनाथ धाम धार्मिक आस्थान का केन्द्र है तथा इस पवित्र स्थान की उच्चकोटि की गरिमा है। पवित्र धाम में इसप्रकार के सामूहिक आयोजन एवं उसमें उच्चावृत्ति की साउण्ड का प्रयोग करना पवित्र धाम की गरिमा के विपरीत है, इससे श्री बद्रीनाथ धाम में प्रतिदिन आयोजित होने वाले पूजा अर्चना कार्यकमों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। पवित्र धाम में इसप्रकार के कार्यक्रम से धार्मिक विद्वानों में अप्रसन्ता की भावना उत्पन्न होती है तथा स्थानीय प्रशासन की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आप द्वारा श्री बद्रीनाथ धाम में इसप्रकार का आयोजन किये जाने का क्या औचित्य था तथा इस कार्यकम के आयोजन के संबंध में क्या आप द्वारा कोई अनुमति प्राप्त की गई है।

अतः आप कृपया उक्त संदर्भित आयोजन के संबंध में अवगत कराने का कष्ट करें कि श्री बद्रीनाथ धाम में कल्चरल प्रोग्राम आयोजित किये जाने के संबंध में कोई अनुमति सक्षम स्तर से प्राप्त की गई थी तथा प्रोग्राम में उच्चावृत्ति की साउण्ड का प्रयोग किन कारणों से किया गया है। साथ ही भविष्य हेतु यह भी सुनिश्चित कर लिया जाये कि इसप्रकार की पुनरावृत्ति श्री बद्रीनाथ धाम में न होने पावे।

(गौरव कुमार) जिलाधिकारी,

चमोली। 26

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