करोड़ों खर्च करने के बावजूद पौड़ी-टिहरी में घटा फल उत्पादन क्षेत्र

उद्यान विभागः झूठ बोलकर लूट रहा वाहवाही

पलायन आयोग की रिपोर्ट-1

अविकल थपलियाल

देहरादून। उत्त्तराखण्ड का उद्यान विभाग। फल उत्पादन के झूठे आंकड़े देकर ताज पहन रहा है। राज्य के पलायन आयोग की रिपोर्ट से इस झूठ से पर्दा हटाया गया है।

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उत्तराखंड में फल उत्पादन क्षेत्रफल का जो आंकड़ा उद्यान विभाग बता रहा है, वह पलायन आयोग के आंकड़ों से दूर-दूर तक मेल नहीं खा रहा है।
हार्टिकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन, जिला योजना, राज्य सेक्टर, बाह्य सहायतित, कृषि विकास, परम्परागत कृषि विकास, जनजातीय विकास योजना निधि और नाबार्ड आदि योजनाओं से हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद उद्यान मालिकों का उद्यानों से मोह भंग होता जा रहा है।

राज्य में औद्यानिकी क्षेत्रफल तेजी से घट रहा है।
उद्यान विभाग के अनुसार पौड़ी जिले में वर्ष 2015-16 में 20,301 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फल उद्यान थे। लेकिन, पलायन आयोग के वर्ष 2018-19 किए गए सर्वे में पौड़ी जिले में मात्र  4042 हेक्टेयर क्षेत्रफल में उद्यान पाए गए। यानि 16,259 हेक्टेयर में बगीचों का नामों निशा नही पाया गया।

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इसी तरह,टिहरी जिले में वर्ष 2017-18 में सेब का क्षेत्रफल 3820 से घटकर 853 हेक्टेयर पर ही रह गया। जबकि, नाशपाती का 1815 से घटकर 240, पुलम का 2627 से घटकर 240, खुबानी का 1498 से घटकर 162 तथा अखरोट का 4833 से घटकर 422 हेक्टेयर रह गया है। यही हाल अन्य जिलों का भी है।

बख्शी-पटनायक कमेटी ने भी माना उद्यान विभाग केे मात्र 13 प्रतिशत आंकड़ें ही सही है।

वर्ष 1986 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के आठ पहाड़ी जिलों में उद्यान विकास के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने बक्शी एवं पटनायक कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि उद्यान विभाग द्वारा फल उत्पादन के आंकड़े मात्र 13 प्रतिशत ही सही हैं।

खराब फल पौध, अनुचित तरीके से पैकिंग और कृषकों के खेत तक पौध ढुलान गलत तरीके से करने के कारण 40 प्रतिशत पौधे, पौधरोपण के पहले वर्ष में ही मर जाते हैं। जबकि, उद्यान विभाग, विभिन्न योजनाओं में लगाए गए पौधों के हिसाब से हर वर्ष पौधरोपण का क्षेत्रफल और फलों का उत्पादन बढ़ता रहता है, इसलिए विभाग के आंकड़े सही नहीं होते हैं।

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औद्यानिकी विशेषज्ञ डाॅ. राजेंद्र कुकसाल का कहना है कि राज्य के सही नियोजन के लिए वास्तविक आंकड़ों का होना आवश्यक है। काल्पनिक आंकड़ों के सहारे फल उत्पादन नहीं बढ़ाया जा सकता है।

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