राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का विभागों के एकीकरण पर कड़ा एतराज


बिना कर्मचारी संगठनों को विश्वास में लेकर एकीकरण की कार्यवाही करने का आरोप।
आपत्तियों के निस्तारण के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेंगे कर्मचारी संगठन

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने बिना कर्मचारी संगठनों को विश्वास में लिए विभिन्न विभागों के एकीकरण की कार्यवाही पर कड़ा एतराज जताया है।
शुक्रवार को शासन स्तर पर जिन विभागों के एकीकरण की कार्यवाही चल रही है, उनके कर्मचारी संगठनों की राज्य कर्मचारी परिषद के प्रांतीय पदाधिकारियों के साथ बैठक हुई।

Uttarakhand karamchari sangh

बैठक की जानकारी देते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश कार्यकारी महामंत्री अरूण पाण्डे ने बताया कि शासन स्तर पर जिन विभागों का एकीकरण करने की कार्रवाई की जा रही है, उनमें निचले स्तर के (समूह-ग एवं घ) कार्मिकों के पदों की बडी संख्या में कटौती प्रस्तावित है। यही नहीं एकीकरण की कार्यवाही में विभागीय संगठनों को भी विश्वास में नहीं लिया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में रोष है।

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महामंत्री अरुण पांडेय


बैठक में कृषि एवं उद्यान विभाग, खेल एवं युवा कल्याण विभाग का खाद्य विभाग का उदाहरण देते हुए कहा गया कि इनके एकीकरण के प्रस्ताव शासन में गतिमान हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री एवं विभागीय मंत्रियों के निर्देशों के बावजूद विभागीय संगठनों को एकीकरण की प्रक्रिया से अलग रखा जा रहा है। जबकि, विभागीय संगठन शासन और विभागीय मंत्रियों के साथ बैठक कर अपनी आपत्तियों के निराकरण की मांग कर रहे हैं। बैठक में बताया गया कि कृषि एवं उद्यान मंत्री के आश्वासन के बावजूद कर्मचारियों को बिना विश्वास में लिए र्तासन स्तर पर दोनों विभागों का एकीकरण कार्य का बटंवारा भी कर दिया गया है।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि इस संबंध में शीघ्र ही मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्रिगण एवं मुख्य सचिव से मिलकर विरोध दर्ज कराते हुए कार्मिक संगठनांे द्वारा की जा रही आपत्तियों के निराकरण की मांग की जायेगी।
बैठक में ठाकुर प्रह्लाद सिंह, नन्द किशोर त्रिपाठी, अरूण पाण्डे, शक्ति प्रसाद भट्ट, डीएस असवाल, वीके धस्माना, दीपक पुरोहित, गिरीजेश काण्डपाल, पीएस रौथान, सुनील देवली, देवेन्द्र सिंह रावत, इन्द्रमोहन कोठारी, हर्षमोहन नेगी, आरपी जोशी, चैधरी ओमवीर सिंह और गुड्डी मटुड़ा आदि कर्मचारी नेता शामिल थे।

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