वेणुगोपाल- प्रीतम की गर्मागर्मी के बाद हुई रंजीत की ताजपोशी, हरदा को झटका

हरीश गुट को भारी झटका

केंद्रीय नेतृत्व ने प्रबल हरीश विरोधी रंजीत को दी तवज्जो

आर्येन्द्र की ताजपोशी भी हरीश गुट के लिए दोहरा झटका। हरीश धामी ने खोला मोर्चा

अविकल थपलियाल

देहरादून। एक समय हरीश रावत के खास कमांडर रहे और अब धुर विरोधी रंजीत रावत का नाम आखिरी समय में कांग्रेस की लिस्ट में जुड़ा। (देखें सूची में रंजीत रावत के नाम का फोंट अन्य नामों से बड़ा है)। यह खेल भी बहुत दिलचस्प हुआ।

नये कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत रावत

पुष्ट सूत्रों का कहना है कि अंतिम समय में राजपाल खरोला का नाम काटकर रंजीत रावत का नाम जोड़ा गया। यह नाम व्यक्तिगत तौर पर हरीश रावत के लिये कष्टकारी माना जा रहा है।

देखें बड़े फोंट में रंजीत रावत का आखिरी समय में जोड़ा गया नाम

इससे यह बात भी साफ हो गयी कि कांग्रेस हाईकमान ने हरीश विरोधी गुट को भी तवज्जो दी। पुष्ट सूत्रों के मुताबिक गुरुवार को देहरादून में धरना प्रदर्शन के बाद कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने प्रीतम सिंह को फाइनल लिस्ट की जानकारी दी।  सूची के नाम जानकर प्रीतम सिंह ने फोन पर ही अपनी नाराजगी जता दी। यही नहीं, अपने मूल शांत व्यवहार से इतर प्रीतम सिंह ने फोन पर ही काफी गर्मागर्मी दिखाई।

सूत्रों के मुताबिक आधे घण्टे बाद ही वेणुगोपाल का फिर प्रीतम सिंह के पास फोन आया। और रंजीत रावत को राजपाल खरोला की जगह कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फैसला सुनाया। सूत्रों के मुताबिक प्रीतम सिंह ने रंजीत रावत को नये फैसले की जानकारी दी। चंडीगढ़ में मौजूद हरीश रावत को अंदरखाने चल रही रंजीत रावत की ताजपोशी की भनक तक नही लगी।

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश प्रभारी ने नये नाम को लेकर  राहुल गांधी से बात की। और पुरानी ही सूची से राजपाल खरोला का नाम हटाकर रंजीत रावत का नाम अलग लेकिन बड़े फोंट ओर टाइप कर दिया गया (देखें सूची में रंजीत रावत का नाम बाकी नामों से बड़े फोंट में है)।

सूत्रों के मुताबिक सल्ट उपचुनाव में हरीश रावत पर प्रहार करने वाले पूर्व विधायक रंजीत रावत का कार्यकारी अध्यक्ष बनना हरीश कैम्प के लिए बड़ी राजनीतिक हार मानी जा रही है। एक समय दोनों के बीच चोली दामन का साथ रहा । लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है। पार्टी नेतृत्व ने सारे खेल को बूझते हुए धुर विरोधी रंजीत रावत को महत्वपूर्ण पद दे हरीश रावत की पेशानी पर बल जरूर डाल दिये हैं।

चारों कार्यकारी अध्यक्ष में पूर्व विधायक जीतराम आर्य को हरीश रावत का नजदीकी माना जाता है। जबकि बाकी तीन प्रीतम सिंह के साथ खड़े हैं।

हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष गोदियाल व चुनाव अभियान समित्ति में अपने करीबियों को एडजस्ट कर हरीश रावत संतोष कर सकते है लेकिन रंजीत रावत की कुर्सी ने उनकी खुशी में खलल अवश्य डाल दिया।

आर्येन्द्र की ताजपोशी भी दोहरा झटका

कोषाध्यक्ष  पद पर आर्येन्द्र शर्मा की ताजपोशी भी हरीश गुट के लिए गर्म दूध बन गया।
बीते काफी समय से पूर्व विधायक रंजीत रावत व आर्येन्द्र शर्मा प्रीतम सिंह की मुख्य ढाल बने हुए थे। दिल्ली में कांग्रेस गलियारे के हर रास्ते का इन दोनों को पता है। इधर, हरीश गृत के खास हरीश धामी ने आर्येन्द्र को कोषाध्यक्ष बनाये जाने का खुला विरोध कर नया मोर्चा खोल दिया है

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