जनता से मिल रहे बदलाव के साफ संकेत-हरीश रावत
चार सिद्धपीठों के बाद संविधान और राज्य आंदोलन के प्रतीकों को किया नमन
अविकल उत्तराखंड
देहरादून। स्वास्थ्य कारणों से लंबे समय तक राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की देहरादून वापसी के बाद सियासी सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
सोमवार को चार सिद्धपीठों के दर्शन के बाद मंगलवार को हरदा ने घंटाघर पहुंचकर डॉ. भीमराव अंबेडकर और उत्तराखंड आंदोलन के प्रमुख नेता इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया।
इस दौरान रावत ने भाजपा पर संविधान, महंगाई, बेरोजगारी और धर्म की राजनीति को लेकर निशाना साधा और कार्यकर्ताओं से आगामी चुनाव के लिए जुटने का आह्वान किया।

दोपहर करीब 12:30 बजे घंटाघर पहुंचे रावत ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और संविधान की रक्षा का संकल्प लिया।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का संविधान, समानता और सामाजिक न्याय का संदेश देश का मार्गदर्शन करता रहेगा। रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर धर्म की राजनीति को आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि समाज में आपसी प्रेम और भाईचारा भारत की पहचान रहा है, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास किया जा रहा है।
रावत ने 2024 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने कई क्षेत्रों में भाजपा को जवाब दिया है।
इसके बाद करीब एक बजे रावत ने इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने कहा कि बडोनी को उत्तराखंड का गांधी कहा जाता है और राज्य आंदोलन में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
चार सिद्धपीठों में दर्शन, कांग्रेस की वापसी का संकल्प
इससे पहले दिल्ली से आने के बाद सोमवार को रावत ने देहरादून के कालू सिद्ध, लक्ष्मण सिद्ध, माणक सिद्ध और मांडू सिद्ध में पूजा-अर्चना की थी। उनके साथ पूर्व मंत्री गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक हरीश धामी, मनोज तिवारी समेत पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। रावत ने इन धार्मिक स्थलों पर प्रदेश की सुख-समृद्धि और कांग्रेस की राजनीतिक वापसी का संकल्प व्यक्त किया।

रावत ने कहा कि स्वास्थ्य कारणों से वह लंबे समय तक राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर रहे, लेकिन अब वह कार्यकर्ताओं के बीच लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से हटाने की जिम्मेदारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उठानी होगी। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवा निराश हैं और जनता गंभीर समस्याओं से जूझ रही है।
चंदन जीना प्रकरण से गरमाया सियासी माहौल
हरीश रावत की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है, जब उनके पूर्व OSD और वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में बहस तेज है।
10 सितंबर को ईडी ने वीपीडीओ परीक्षा-2016 में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जीना के आवास समेत कई स्थानों पर तलाशी ली थी। ईडी की कार्रवाई में लाखों की नकदी, सोना और महंगी घड़ियां बरामद किए जाने की बात सामने आई है।
कार्रवाई के बाद रावत ने अपने राजनीतिक कार्यकाल की जांच कराने की खुली चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनके कार्यकाल को लेकर सवाल हैं तो आयोग गठित कर पूरे कार्यकाल की जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार के दौरान हुई भर्तियों में पद के दुरुपयोग की गुंजाइश नहीं थी।
ईडी कार्रवाई और रावत की ओर से कांग्रेस के पदों से इस्तीफे की पेशकश के बाद प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में भी हलचल रही है। हालांकि, सोमवार को चार सिद्धपीठों की यात्रा और मंगलवार को अंबेडकर-बडोनी को नमन के कार्यक्रमों के जरिये रावत ने कार्यकर्ताओं के बीच अपनी सक्रियता का संदेश दिया। सोमवार को उन्होंने कहा था कि चुनाव से पहले ईडी और सीबीआई की कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं और वह फिलहाल पार्टी के एक सिपाही हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव की कमान संभाले कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने हरीश रावत के हालिया दौरे से दूरी बनाई हुई है। हरदा के कई पुराने साथी अवश्य नजर आ रहे हैं।
सहसपुर से कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके आर्येन्द्र शर्मा की हरीश रावत के साथ मौजूदगी नये राजनीतिक संकेत दे रही है।
सहसपुर से हरक सिंह रावत ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। ऐसे में पूर्व सीएम एनडी तिवारी के ओएसडी रहे आर्येन्द्र शर्मा ने हरदा को पकड़ कर हरक को भी अपना सन्देश पहुंचा दिया।
बहरहाल, पूर्व सीएम हरीश रावत की इस सक्रियता ने चुनावी तैयारियों और रणनीति पर अतिरिक्त गर्मी तो पैदा कर ही दी है।



