वैज्ञानिक व तकनीकी क्षमता का समन्वय विकसित भारत की नीव – प्रोफेसर दत्ता

नरेंद्रनगर। मानव पूंजी का लाभांश, तकनीकी एवं वैज्ञानिक शिक्षा, संस्कृतिक विश्वास के विकास पर समन्वित कार्य किए जाने से नई शिक्षा नीति से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।


यह विचार डीबीएस पीजी कॉलेज देहरादून की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर राजलक्ष्मी दत्ता ने हाइब्रिड मोड की पैनल परिचर्चा में मुख्य पैनलिस्ट के रूप में व्यक्त किये।


राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नागर ने बुधवार को अखिल भारतीय शिक्षा समागम द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के 6 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक माह तक चलने वाले विभिन्न गतिविधियों के अंतर्गत पैनल चर्चा का आयोजन किया है।


हाइब्रिड मोड में आयोजित इस चर्चा में बड़ी संख्या में छात्र एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया नई शिक्षा नीति से विकसित भारत 2027 पर पैनलिस्ट के रूप में डॉ संजय महर ने नई शिक्षा से बहुविषयक अध्ययन,कौशल विकास तथा एबीसी आईडी से रोजगार के अवसरों की छानबीन करने में बड़ी मदद की बात कही।


उन्होंने इसे विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया।
परिचर्चा में डॉ हरिश्चंद्र रतूड़ी ने भारतीय शिक्षा नीति के इतिहास, नई शिक्षा नीति के लाभों पर चर्चा की।
पैनलिस्ट डॉ सोनी तिलारा ने छात्रों के प्रश्नों का समाधान करते हुए नई शिक्षा नीति पर प्रकाश डाला।
परिचर्चा में पैनलिस्ट के रूप में प्रतिभागिता करते हुए डॉ विक्रम सिंह बर्त्वाल ने कहा कि ‘बहुविषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय’ ( MERU) के अंतर्गत चयनित भारत के 35 राज्य विश्वविद्यालय विकसित भारत के लिए “मेरुदंड” का कार्य कर सकते हैं। बशर्ते संरचनागत विकास, सामाजिक एवं भौगोलिक पृष्ठभूमि का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन एवं प्रतिपुष्टि लेकर कार्य किया जाए।


इस अवसर पर एनएसएस यूनिट के छात्रों ने भी पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विकसित भारत प्रतियोगिता आयोजित की।
परिचर्चा के सफल संपादन के लिए कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर विजय सिंह नेगी ने पैनल परिचर्चा कार्यक्रम की संयोजक डॉ भारती जायसवाल तथा पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता के संयोजक मंडल की सदस्य डॉ ज्योति शैली एवं डॉ विजय प्रकाश भट्ट के साथ समस्त कॉलेज स्टाफ को बधाई दी है।
कार्यक्रम का संचालन डॉ जितेंद्र नौटियाल ने किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त छात्र एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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