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अब उत्तराखंड में ही होगी गौ हत्या से जुड़े नमूनों की फोरेंसिक जांच

गौ उत्तकों को जांच के लिए मथुरा-चंडीगढ़ भेजा जाता था

नवंबर 2019 में ऋषिकेश के निकट पशुलोक विधि विज्ञान प्रयोगशाला हेतु चयनित

अधिसूचना जारी, जिले के मुख्य पशु चिकित्सक को भेजा पत्र

अविकल उत्तराखण्ड ब्यूरो

अब गौ हत्या से जुड़े मामलों की फोरेंसिक जांच प्रदेश में ही होगी। ऋषिकेश के पास पशुलोक में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना के साथ ही गौ उत्तकों के नमूनों की जांच का रास्ता साफ हो गया है।

उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड के सचिव डॉक्टर के के जोशी ने विभाग के सभी जिला इकाइयों को इस बाबत सूचित कर दिया है।

अभी तक गौ हत्या के मामलों में गौ उत्तकों के नमूनों की फोरेंसिक जांच के लिए उत्तराखंड को मथुरा व चंडीगढ़ की लैब निर्भर रहना पड़ता था।

जांच रिपोर्ट मिलने में भी कई महीने लग जाते थे। राज्य बनने के बाद पशुपालन विभाग को इस दिक्कत से कई बार रूबरू होना पड़ा। पुलिस के कर्मचारियों को भी दूसरे राज्यों में सहयोग नही मिलता था।

उत्तर प्रदेश का भी दबाव था कि उत्तराखंड अपने यहाँ फ़ॉरेंसिक लैब बना कर गौ हत्या के मामलों की जांच स्वंय करे। अधिसूचना जारी होने के बाद फ़ॉरेंसिक लैब के संचालन का रास्ता साफ हो गया है।

पशुपालन विभाग के निदेशक डॉक्टर के के जोशी ने बताया कि उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड के प्रस्ताव अनुसार उत्तराखंड शासन द्वारा गौहत्या की दशा में गौ उत्तकों के नमूनों को प्रदेश से बाहर भेजने की असुविधा के समाधान हेतु, उत्तराखंड राज्य गौ वंश संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत, पशुलोक में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना हेतु अधिसूचना जारी की गई है।

डॉक्टर जोशी के अनुसार, निदेशक पशुपालन विभाग उत्तराखंड/ पदेन सदस्य सचिव उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड द्वारा गौहत्या की दशा में, गौ उत्तकों के नमूनों संकलन एवम् हस्तांतरण हेतु, उत्तराखंड राज्य गौ वंश संरक्षण नियमावली 2018 के प्रावधानों के तहत, आदर्श कार्यवाही प्रक्रिया  निर्धारित की गई।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड गौ वंश संरक्षण नियमावली 2018 के प्रारूप 17 एवम् प्रारूप 18 के अनुरूप पशुपालन विभाग एवम् पुलिस विभाग के सक्षम प्राधिकारियों द्वारा परस्पर समन्वय एवम् तदनुसार कार्यवाही की अपेक्षा की जाती है।

डॉक्टर जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बाबत राज्य के दो पशु चिकित्सक प्रसून दुबे व शालिनी पांडेय NRCM हैदराबाद से डीएनए व फिंगरप्रिंट का विशेष प्रशिक्षण लेकर उत्तराखंड लौट आये हैं।

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