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उजली कमीज के साथ स्वंय को साबित करना होगा नए मुख्य सचिव को

अविकल थपलियाल

 

बधाई,उत्तराखंड के नए नवेले मुख्य सचिव ओमप्रकाश जी। उत्तराखंड के नए मुख्य सचिव ओमप्रकाश के साथ विवाद भी जुड़े रहे। हाल ही में कोरोना लॉकडौन में उत्तर प्रदेश के निर्दलीय विधायक अमनमणि को बद्रीनाथ व केदारनाथ तक का पास देने के मामले में ओमप्रकाश को काफी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा। लेकिन नए मुखिया को अब पहाड़ को रिजल्ट देते हुए स्वंय को साबित करना होगा।

मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व नए मुख्य सचिव ओमप्रकाश के समन्वय और संतुलन पर पूरे उत्तराखण्ड की निगाह है

कोरोना काल में वीवीआईपी पास देने का यह मसला हाईकोर्ट की दहलीज तक भी पहुंचा। अदालत ने डीजीपी को 31 जुलाई तक जांच करने के निर्देश दिए। इसके अलावा ढैंचा बीज घोटाले, ओनिडा फैक्ट्री अग्निकांड व मृत्युंजय मिश्रा के मुद्दे पर भी वरिष्ठ अधिकारी ओमप्रकाश पर कई आरोप लगे। लेकिन त्रिवेंद्र सिंह रावत के कृषि मंत्री की कुर्सी संभालने से लेकर आज तक ओमप्रकाश उनके विश्वस्त बने रहे। इसी भरोसे का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने ईनाम भी दिया।

नए मुख्य सचिव को लेकर सत्ता के गलियारों में यह चर्चा भी हमेशा तैरती रहती है कि वे एक विशेष प्रकार के कॉकस से घिरे रहते हैं। और जिस पर कुपित हो जाएं उसको घूमते रह जाओगे की तर्ज पर घुमाना भी खूब जानते हैं।

नए मुख्य सचिव ओमप्रकाश। 1987 बैच के आईएएस

शिक्षा विभाग में प्रोफेसर मृत्युंजय मिश्रा भी लंबे समय तक नए मुख्य सचिव की नाक का बाल बना रहा। सत्ता के दमदार लोगों के आशीर्वाद की वजह से ही मृत्युंजय मिश्रा हर सरकार में खास खास कुर्सियों में रहा।  बाद में एक स्टिंग मामले और उगाही समेत अन्य कई गंभीर धाराओं में मृत्युंजय मिश्रा को जेल जाना पड़ा।

ओमप्रकाश से मृत्युंजय के गहरे संबंध भी मीडिया की सुर्खियां बने रहे।  मृत्युंजय मिश्रा लगभग 18 महीने से अभी भी जेल में ही है। लेकिन सत्ता के गलियारों में मृत्युंजय मिश्रा की जिन हस्तियों से नजदीकी रही, उनमें कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों के करीबी भी शामिल है। मृत्युंजय के जेल जाने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यालय में बेरोक टोक आने वाले कुछ लोगों के दामन भी रंगे।

उत्तराखंड का सचिवालय। भ्र्ष्टाचार और विकास से जुड़े तमाम अहम सवाल इन्ही गलियारों में गूंजते रहते हैं

अब चूंकि, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के भरोसेमंद ओमप्रकाश शासन के मुखिया बन गए है। दो-ढाई साल का समय भी उनके पास है। ऐसे में तमाम गुटबाजी से किनारा करते हुए उत्तराखण्ड की विकास योजनाओं को भ्र्ष्टाचार मुक्त रखते हुए अंजाम तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती रहेगी। नए मुख्य सचिव को उन लोगों से भी सचेत रहना होगा जो वन टू का फोर करने के माहिर हैं।

इसके अलावा अपनी कमीज को कैसे उजला रख पाते हैं ये भी नए मुख्य सचिव के एजेंडे की सबसे बड़ी चुनौती होगी। उत्तराखंड के सुदूरवर्ती बाशिंदे को सरकारी विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ मुहैया करवाने का तोड़ भी नए मुखिया ओमप्रकाश को ही तलाशना पड़ेगा। शासन की ढीली रफ्तार को तेज कैसे करेंगे, उत्तराखंड इसकी भी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा है।

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