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रोजगार-शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधा में कमी ही पलायन की मुख्य वजह-त्रिवेंद्र सिंह रावत

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित हुई ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की बैठक

बागेश्वर के ग्रामीण क्षेत्रों पर आधारित रिपोर्ट का किया विमोचन

आयोग की 11 रिपोर्ट पर राज्य सरकार ले रही नीतिगत निर्णय

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यह कहने से गुरेज नहीं किया कि राज्य में पलायन की मुख्य वजह शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा में कमी व रोजगार का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि पलायन आयोग की पहली रिपोर्ट से ही यह कारण  स्पष्ट हो गए थे।

Palayan uttarakhand

पलायन आयोग द्वारा पलायन के मूल कारणों से सम्बन्धित दी गई प्राराम्भिक रिपोर्ट से ही स्पष्ट था कि राज्य से पलायन के मूल में रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य रहे। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना कि सरकार पलायन आयोग के सुझावों पर अमल करते हुए नीतिगत निर्णय ले रही है।

मंगलवार को उत्त्तराखण्ड के पलायन आयोग ने एक और सिफारिश सरकार को सौंप दी है। उत्त्तराखण्ड पलायन आयोग विभिन्न जिलों के पलायन के कारकों को तलाशते हुए कुछ सुझाव भी सरकार को दे रहा है। आयोग ने मंगलवार को बागेश्वर जनपद से जुड़ी पलायन की तस्वीर सीएम त्रिवेंद्र रावत के सामने रखी। कुल मिलाकर पलायन आयोग अभी तक 11 सिफारिश सरकार को सौंप चुका है।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सचिवालय में ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग की बैठक आहूत की गई।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने जनपद बागेश्वर के ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक व आर्थिक विकास को सुदृढ़ करने एवं पलायन को कम करने हेतु आयोग द्वारा की गई सिफारिशों से सम्बन्धित पुस्तिका का विमोचन किया।

उन्होंने कहा कि आयोग को वर्किंग एजेन्सी के रूप में नहीं अपितु राज्य से पलायन रोकने तथा ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक व आर्थिक विकास के लिये थिंकटेक के रूप में कार्य करना होगा। आयोग के सदस्यों को ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न स्तरों पर कार्य करने का अनुभव है। उनके अनुभव राज्य के समग्र विकास में उपयोगी होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कोविड-19 से पूर्व ही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, सोलर स्वरोजगार योजना तथा ग्रोथ सेन्टरों की स्थापना, एलईडी योजना का कार्य गतिमान रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक विकास एवं स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के साधन उपलब्ध करना इसका उद्देश्य था। सीमान्त क्षेत्रों के समग्र विकास के लिये मुख्यमंत्री सीमान्त सुरक्षा निधि की व्यवस्था की गई है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं की सरकारी खरीद के लिये 5 लाख तक की सीमा निर्धारित की गई है।

उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा यूनीफार्म आपूर्ति के क्षेत्र में भी कार्य किया जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में इसे और विस्तार दिये जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के कारगर ढ़ंग से उपयोग की दिशा में पहल की गई है। चीड़ से बिजली व पेलेटस बनाये जा रहे है। एलईडी निर्माण में 15 संस्था कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने ग्रोथ सेन्टरों में क्रेडिट कार्ड योजना आरम्भ किये जाने की भी बात कही।

बैठक में उपाध्यक्ष, ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग डॉ एसएसनेगी ने बताया कि आयोग द्वारा अब तक राज्य के पर्वतीय जनपदों, ईको टूरिज्म, ग्राम्य विकास एवं कोविड-19 के प्रकोप के दौरान राज्य में लौटे प्रवासियों एवं उनके पुनर्वास पर आधारित 11 सिफारिशे प्रस्तुत की जा चुकी है।

बागेश्वर जनपद-पलायन एक नजर

पिछले 10 वर्षों में 346 ग्राम पंचायतों से कुल 23,388 व्यक्तियों ने अस्थायी रूप से पलायन किया। पिछले 10 वर्षों में 195 ग्राम पंचायतों से 5912 व्यक्तियों द्वार पूर्णरूप से स्थायी पलायन किया गया है। बागेश्वर जिले के सभी विकास खण्ड़ो में स्थायी पलायन की तुलना में अस्थायी पलायन अधिक हुआ है।

जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार जनपद बागेश्वर की जनसंख्या 2,59,898 है, इनमें 1,24,326 पुरूष तथा 1,35,572 महिलाएं है।  जनपद की प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2016-17 के लिए अनन्तिम रूप से 1,00,117 रूपये है।

बागेश्वर जनपद के लिए पलायन आयोग की सिफारिश

पशुधन की गुणवत्ता में सुधार एवं कृत्रिम गर्भाधान केन्द्रों की संख्या बढ़ाना।

दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध उत्पादकों की उपज हेतु पनीर, घी आदि बनाने का प्रशिक्षण दिये जाने, दुग्ध समितियों की सक्रियता बढ़ाने एवं दुग्ध प्रसंस्करण केन्द्र खोले जाने।

होम स्टे की संख्या बढ़ाये जाने, इकोटूरिज्म, पर्यटन से जुड़े कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ाने, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं उद्यमिता विकास कार्यक्रम आयोजित किये जाने।

मनरेगा में समान अवसर और भागीदारी सुनिश्चित करके महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बनाए रखना। फसलों को बंदरों और जंगली सूअरों से नुकसान से बचाव हेतु वन विभाग की सहायता से बन्दरबाड़ो/सोलर पावर फैन्सिंग का निर्माण कराये जाना।

ग्राम पंचायतों में नर्सरियां बनाने तथा औषधीय एवं सुगंधित पौंधों की कृषि को महत्वपूर्ण आजीविका उत्पादन गतिविधियों में विकसित किए जाना,  जड़ी-बूटी की खेती एवं कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने। चाय व बागवानी के क्षेत्रों को बढ़ाये जाने का सुझाव दिए गए हैं।

अपर मुख्य सचिव मनीषा पंवार ने आयोग की सिफारिशों पर की जा रही कार्यवाही की जानकारी दी। आयोग के सदस्य सचिव  रोशन लाल एवं अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

आयोग के सदस्यों रामप्रकाश पैन्यूली,  सुरेश सुयाल, दिनेश रावत घण्डियाल,  अनिल सिंह शाही एवं वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रुद्रप्रयाग से रंजना रावत ने अपने सुझाव रखे।

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