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सेक्स स्कैंडल-आईजी अभिनव ने जांच पौड़ी महिला थाने को सौंपी, पीड़िता के खिलाफ आरोप पत्र वापस होगा

आईजी गढ़वाल के आदेश से विभाग में मची खलबली

आईजी अभिनव कुमार सेक्स प्रकरण की जांच और दिशा से आश्चर्यचकित, कड़ा फैसला ले दिया संदेश

भाजपा सरकार की हो रही थी जबरदस्त किरकिरी

अविकल उत्त्तराखण्ड

देहरादून। भाजपा विधायक महेश नेगी से जुड़े बलात्कार के मामले की जांच अब पौड़ी के महिला थाने को सौंप दी गयी है। इसके अलावा ब्लैकमेलिंग के मामले में पीडिता के खिलाफ दायर आरोप पत्र भी वापस लेने के आदेश कर दिए गए हैं। आरोप पत्र दाखिल करने के 24 घण्टे के अंदर ही एक्शन में आये आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार ने तत्काल ठोस निर्णय ले महकमे को कड़ा संदेश भी दे दिया।

सेक्स स्कैंडल में पीड़िता के खिलाफ आरोप पत्र पेश करने सम्बन्धी देहरादून पुलिस के कदम को आला अधिकारियों ने काफी गंभीरता से लिया है। और इसके कुप्रभाव के बाबत ऊपर तक भी सच्चाई बता दी गयी।

पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए भाजपा विधायक महेश नेगी से जुड़े प्रकरण की जांच पौड़ी महिला थाने को सौंप दी है। इसके अलावा ब्लैकमेलिंग मामले में पीड़ित महिला के खिलाफ पेश किए गए आरोप पत्र को भी वापस लेने के आदेश दिए गए हैं। अभी तक यह जांच सीओ अनुज कुमार व सब इंस्पेक्टर आशा पंचम के हवाले थी।

भाजपा विधायक महेश नेगी व रीता नेगी

आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार के केस आदेश के बाद बहुचर्चित हाईप्रोफाइल सेक्स प्रकरण में एक नया मोड़ आ गया है। पुष्ट सूत्रों का कहना है कि सेक्स प्रकरण की जांच और दिशा से आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार काफी सकते व गुस्से में हैं। उन्होंने अधीनस्थों को कड़ी फटकार भी लगाई।

सोमवार की रात को आरोप पत्र सम्बन्धी खबर के फ़्लैश होते ही पुलिस के बड़े व अनुभवी अधिकारियों ने इस निर्णय पर हैरानी जताई। देहरादून पुलिस की इस जांच के बाद से ही होने वाले प्रभाव के बारे में सत्ता व उच्चाधिकारियों को ब्रीफ कर दिया गया था। 13 अगस्त से इस मामले की जांच चल रही है।

पीड़ित महिला

विधायक महेश नेगी की पीड़िता के साथ लगभग आधा दर्जन स्थानों में रहने के पुख्ता प्रमाण पत्र मिलने के बाद भी पीडिता के खिलाफ ब्लैकमेलिंग के मुद्दे पर आरोप पत्र दिए जाने से बड़े अधिकारियों के कान भी खड़े हो गए।

पुष्ट सूत्रों के मुताबिक आई जी गढ़वाल अभिनव कुमार ने इस मामले में आये नये मोड़ के बाबत उच्च स्तर पर मंथन किया। उच्च पदस्थ अधिकारियों का भी मानना है कि पीडिता की डीएनए जॉच के बजाय दून पुलिस ब्लैकमेलिंग समेत अन्य मुद्दों पर विशेष फोकस कर चल रही है।

पुलिस सूत्रों का यह भी मानना है कि एक ही केस की जांच सीओ अनुज कुमार व सब इंस्पेक्टर आशा पंचम के स्तर पर की जा रही है। जबकि कानूनन इस मामले में एक ही अधिकारी को समूची जॉच करनी चाहिए।

गौरतलब है कि बलात्कार व डीएनए जॉच से जुड़े इस मामले में देहरादून पुलिस की जांच को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे थे। पीड़ित महिला की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। बाद में कोर्ट के आदेश पर 5 सितम्बर को विधायक महेश नेगी व पत्नी रीता नेगी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इधर, 21 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने भी विधायक को नोटिस जारी करते हुए देहरादून पुलिस को केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे।

विधायक व पीड़िता को मिल चुका है गिरफ्तारी स्टे

इस मामले का रोचक पहलु यह भी है कि विधायक नेगी और पीड़ित महिला को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिल चुका है। सत्ता पक्ष के दबाव की खबरें भी चर्चा का विषय बन चुकी है।

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