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सीएम त्रिवेंद्र को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

अविकल उत्त्तराखण्ड

नई दिल्ली। उत्त्तराखण्ड के सीएम को सुप्रीम कोर्ट के स्टे से बड़ी राहत मिल गयी। गुरुवार को जज अशोक भूषण की कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के सीबीआई जॉच के फैसले पर रोक लगा दी। ANI के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और दो अन्य को नोटिस देते हुए चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने के भी निर्देश दिए हैं।

Supreme court

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने बुधवार को विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जज रविन्द्र मैठाणी के आदेश पर रोक लगा दी। यही नहीं, पत्रकारों के ख़िलाफ़ रद्द किए मुकदमे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे नहीं दिया।

गुरुवार को उत्त्तराखण्ड सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि इस केस में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पार्टी नहीं है और न ही नैनीताल की सिंगल बेंच ने इस मुद्दे पर उनको सुना।
कोर्ट में वेणुगोपाल ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के भी खिलाफ है जिसमे ऐसे फैसलों की इजाजत नहीं दी जाती जिससे कोई सरकार अस्थिर होती हो।

उन्होंने कहा कि,दूसरे पक्ष को सुने बिना कोई भी अदालती फैसला नहीं दिया जा सकता। घटनाओं के आंकलन में उत्त्तराखण्ड हाईकोर्ट गलत साबित हुई है। उन्होंने कहा कि कोर्ट को किसी सरकार को अस्थिर नही कर सकती। अपने तर्कों के साथ अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट से स्टे देने की मांग की।

गौरतलब है की 2016 में झारखंड निवासी अमृतेश चौहान ने आरोप लगाया था कि गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनने के लिए उसने सीएम त्रिवेंद्र के करीबियों के खाते में 25 लाख जमा कराए थे। उस समय त्रिवेंद्र झारखंड के प्रभारी थे।

यह समाचार प्रकाशित करने पर एक पत्रकार राजेश को राजद्रोह में गिरफ्तार किया था। इसी मुद्दे पर नैनीताल हाईकोर्ट के जज रविन्द्र मैठाणी ने सीएम के खिलाफ लगे आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश देने के अलावा राजेश शर्मा, शिवप्रसाद सेमवाल व उमेश कुमार के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द कर दिया था।

इसी मुद्दे पर सीएम ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी।

मैठाणी ने अपने आदेश में सीएम त्रिवेंद्र रावत पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी थी। यही नही नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज राजद्रोह की FIR भी क्वेश कर दी थी।

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